Vishwanath temple&Gyanvapi Mosque : विश्वनाथ मंदिर के इतिहास को लेकर कोर्ट में क्‍या दी दलील? क्‍या है ज्ञानवापी मस्जिद का व‍िवाद?

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Vishwanath temple&Gyanvapi Mosque : वाराणसी में भगवान विशेश्वर की तरफ से नेक्स्ट फ्रेंड की भूमिका में वाराणसी के रहने वाले

विजय शंकर रस्तोगी वा अन्य ने याचिका दाखिल की है.

याचिका में इस विश्वनाथ मंदिर या विशेश्वर मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद का इतिहास बताया गया है.

कहा गया है की बादशाह अकबर के ज़माने में एक बार वाराणसी और उसके आस पास बहुत भयंकर सूखा पड़ा था.

बादशाह ने सभी धर्म गुरुओं से बारिश के लिए दुआ करने का आग्रह किया.

एक आग्रह वाराणसी के धर्म गुरू नारायण भट्टा से भी किया गया.

नारायण भट्टा के दुआ करने पर 24 घंटे में ही बारिश हो गई. इससे बादशाह अकबर बहुत खुश हुए.

वाराणसी के सिविल जज आशुतोष तिवारी ने गुरुवार को आदेश दिया की एक पुरातात्विक विभाग की एक पांच सदस्यीय टीम ,

ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वेक्षण कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट को दे.

इस आदेश को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है

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क्योंकि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में अदालत की कार्रवाई भी इसी प्रकार शुरू हुई थी.

इस मामले के अंतिम फैसले में पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट को अहमियत दी गई थी.

आइए जानते हैं की ज्ञानवापी मस्जिद पर अपना मालिकाना हक जताने वाले पक्षकारों ने अदालत में दाखिल अपनी याचिका में क्या कहा…

नारायण भट्टा ने बादशाह से भगवान विशेश्वर का मंदिर बनाने की इजाजत मांगी.

बादशाह अकबर ने अपने वित्त मंत्री राजा टोडर मल को मंदिर बनाने का आदेश दिया

और इस तरह भगवान विशेश्वर का मंदिर ज्ञानवापी इलाके में बन गया.

मान्यता के मुताबिक, खुद भगवान विशेश्वर ने यहां अपने त्रिशूल से गड्ढा खोद कर एक कुआं बनाया था जो आज भी मौजूद है.

पूरा ज्ञानवापी इलाका एक बीघा, नौ बिस्वा और छह धूर में फैला है.

Vishwanath temple&Gyanvapi Mosque : शिकायत में अंधविश्वास की बात कही गई थी

याचिका में लिखा गया है क‍ि 18 अप्रैल 1669 को किसी ने उस वक्त के बादशाह औरंगजेब को गलत जानकारी दी.

बादशाह से शिकायत की गई क‍ि मंदिर में अंधविश्वास सिखाया जा रहा है.

इसके बादी औरंगजेब ने मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया,और मंदिर के बगल में ही ज्ञानवापी मस्जिद बनवा दिया गया,

जिसमें मंदिर के मलबे का इस्तेमाल हुआ.

हालांकि याचिका में ये नहीं लिखा है क‍ि मस्जिद किसने बनवाया.

औरंगजेब ने या फिर वहां के लोकल मुसलमानों ने.

तब से ही हिंदुओं और मुसलमानों में इस बात को लेकर विवाद होता रहा है. इस बाबत पहला दंगा 1809 में हुआ था.

ज्यादातर विवाद मुसलमानों के मस्जिद के बाहर मंदिर के इलाके में नमाज पढ़ने की वजह से हुआ है.

याचिका में दावा किया गया है की अंग्रेजों ने 1928 में पूरी जमीन हिंदुओं को दे दी थी.

इस आधार पर हिंदू पक्षकार पूरे ज्ञानवापी परिसर पर अपना मालिकाना हक मांग रहे है.

हालांकि अभी ये मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी लंबित है.

1991 के प्लेस ऑफ वरशिप एक्ट के मुताबिक, जो धार्मिक स्थल 15 अगस्त 1947 को जिस स्थिति में थी वो आगे भी ऐसी ही बरकरार रहेगी.

इस कानून का हवाला दे कर मुस्लिम पक्षकारों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को निचली अदालत में दर्ज मुकदमे को खारिज करने की मांग की है.

फिलहाल निचली अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे करने का आदेश भले ही दे दिया हो लेकिन इस पर आगे हाई कोर्ट को भी निर्णय लेना है.

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