बच्चे को पानी पीने के कारण पीटे जाने पर मंदिर के महंत को नहीं अफ़सोस

शुक्रवार यानी 11 मार्च को डासना के ही देवी मंदिर में लगे नल से पानी पीने के कारण मंदिर में रहने वाले श्रृंगीनंदन यादव ने आसिफ़ को न सिर्फ़ बेरहमी से पीटा था बल्कि पीटने का वीडियो बनाकर उसे वायरल भी किया था. वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए पुलिस ने ख़ुद ही मुक़दमा दर्ज किया और श्रृंगीनंदन यादव के साथ वीडियो शूट करने वाले उनके साथी शिवानंद को भी गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया. आसिफ़ का मेडिकल परीक्षण हो चुका है लेकिन अभी एक्सरे और अन्य रिपोर्ट्स नहीं मिली हैं.

छोड़ दे नहीं तो मर जाएगा

आसिफ़ घटना के बारे में कुछ इस तरह जानकारी दी कि “मैं उधर कबाड़ बीनने गया था. मुझे प्यास लगी तो मंदिर में नल देखकर पानी पीने के लिए चला गया. पहले मुझे एक पंडित जी ने बुलाया और पूछा कि क्या कर रहा है. मैंने कहा कि पानी पीने आया था. तो उन्होंने कहा कि ठीक है चले जाओ. मैं बाहर जा रहा था तो एक और पंडितजी आए और उन्होंने कहा कि आओ तुम्हारा वीडियो बनाएंगे. मुझसे मेरा नाम पूछा और पिता का नाम पूछा. मैंने जैसे ही नाम बताया तो मुझे गालियां देकर पीटने लगे. एक भैया उसका वीडियो बना रहे थे. दोनों लोग बहुत हट्टे-कट्टे थे. मुझे बहुत मारा. मेरे सिर में भी चोट लग गई और हाथ मोड़ दिया. फिर वीडियो बनाने वाले ने कहा कि अब छोड़ दे नहीं तो मर जाएगा.”

आसिफ़ के घर से मंदिर की दूरी क़रीब दो किलोमीटर है. आसिफ़ का कहना था कि वो उस तरफ़ पहले भी कई बार गया है और वहां पानी भी पिया है पर उस दिन न जाने क्यों उससे नाम पूछा जाने लगा और फिर पीट दिया गया.

सोशल मीडिया पर निंदा

आसिफ़ के साथ मारपीट के बारे में शायद किसी को पता भी न चलता यदि उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल न हुआ होता. सोशल मीडिया पर वीडियो को अभियुक्तों ने ही अपलोड भी किया.शनिवार को वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया में इस घटना की निंदा होने लगी और #SorryAsif ट्विटर हैंडल ट्रेंड होने लगा. वीडियो क्लिप साझा करके तमाम लोग इस मुद्दे को उठाने लगे. पुलिस ने भी सोशल मीडिया में आई क्लिप का ही संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की. देश-विदेश की मीडिया में भी इस घटना को प्रमुखता से जगह दी गई.

ग़ाज़ियाबाद के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) इराज राजा ने बताया, “वायरल वीडियो का ख़ुद ही संज्ञान लेते हुए पुलिस ने केस दर्ज किया था. बाद में बच्चे के पिता की ओर से दी गई तहरीर को भी उसमें जोड़ दिया गया है. लड़के को पीटने वाले श्रृंगीनंदन यादव को उसी दिन गिरफ़्तार कर लिया गया था . बाद में वीडियो बनाने वाले व्यक्ति शिवानंद को भी गिरफ़्तार कर लिया गया. दोनों अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 504, 505 और 352 के तहत केस दर्ज किया गया है. लड़के की मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ज़रूरी होने पर अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी ,वहीं दूसरी ओर, वीडियो बनाने वाला व्यक्ति पीटने वाले व्यक्ति को कुछ निर्देशित करते हुए भी सुनाई पड़ता है.

मुसलमानों का प्रवेश वर्जित

पुलिस के मुताबिक, मुख्य अभियुक्त श्रृंगीनंदन यादव इस मंदिर में पिछले तीन महीने से रह रहा है. श्रृंगीनंदन यादव इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं और बिहार में सासाराम के रहने वाले हैं.
डासना के जिस देवी मंदिर परिसर में यह घटना हुई है, वह मंदिर पहले भी कई बार विवादों में रहा है. कई एकड़ में बना यह मंदिर काफ़ी प्राचीन बताया जाता है. मंदिर परिसर के भीतर एक विशाल तालाब और गोशाला भी हैं. मंदिर के बाहर मुख्यद्वार पर एक बड़ा सा गेट है जिस पर साफ़तौर पर लिखा हुआ है- ‘यहां मुसलमानों का प्रवेश वर्जित है.’

यह इबारत मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के आदेश के अनुसार लिखी गई है. मंदिर परिसर के भीतर यूपी पुलिस के दो जवानों के अलावा कई सशस्त्र निजी सुरक्षाकर्मियों से घिरे महंत यति नरसिंहानंद ने इस पूरे मामले में बीबीसी से लंबी बातचीत की. उन्हें इस बात का कोई अफ़सोस नहीं है कि मंदिर परिसर के भीतर पानी पीने के लिए एक 14 साल के बच्चे को इतनी बेरहमी से पीट दिया गया. बल्कि वो तो आसिफ़ को बच्चा कहने पर भड़क जाते हैं.

महंत नरिसंहानंद कहते हैं

“आप उसे बच्चा कह रहे हैं? ये सब अपराधी हैं. ये हत्या, डकैती और न जाने कौन-कौन से अपराध करते हैं. हमने इसीलिए मंदिर के बाहर साफ़तौर पर लिखा दिया है कि यहां कोई मुसलमान अंदर नहीं आ सकता. हमारे मठ के कई महंतों की हत्या हो चुकी है और इन लोगों ने मंदिर की ज़मीन क़ब्ज़ा कर रखी है.”महंत नरिसंहानंद अपराधों की लंबी लिस्ट पेश करते हैं और आरोप लगाते हैं कि ये सब करने वाले इस इलाक़े के मुसलमान लोग हैं. वो कहते हैं, “पहले के महंत हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा में विश्वास करते थे और ये लोग उसका ग़लत फ़ायदा उठाते थे. मैंने इनके साथ सख़्ती बरती है, इसीलिए सुरक्षित हूं. अपनी सुरक्षा ख़ुद करता हूं. मंदिर में जो कुछ भी हुआ, हम इसकी पूरी ज़िम्मेदारी लेते हैं और श्रृंगी यादव की क़ानूनी मदद करेंगे, उसकी ज़मानत कराएंगे.”

महंत नरसिंहानंद की बातों से आस-पास के दूसरे लोग भी सहमत हों, ऐसा नहीं है. मंदिर से कुछ ही दूरी पर रहने वाले दिनेश चंद्र यहां कई साल से रह रहे हैं और इस मंदिर में दर्शन करने भी जाते हैं लेकिन उन्हें ऐसा कोई डर नहीं महसूस हुआ जिसका ज़िक्र महंत कर रहे थे. हां, मंदिर परिसर में मौजूद कई लोगों को भी 14 वर्षीय आसिफ़ को बालक या बच्चा कहने पर वैसी ही आपत्ति थी, जैसी कि महंत नरसिंहानंद को.

डासना के सभासद मतीउर्रहमान कहते हैं कि मुस्लिम बहुलता के बावजूद इस इलाक़े में हिन्दुओं और मुसलमानों में सौहार्द बना रहता है.

वो कहते हैं, “महंत जी के अलावा और शायद ही कोई इस तरह की बात करे. महंत यति नरसिंहानंद ने जब से इस गद्दी को सँभाला है तब से वो लगातार मुसलमानों के ख़िलाफ़ ऐसी बातें करते रहते हैं. इलाक़े के लोगों ने इसकी शिकायत भी की है लेकिन उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई.

पुलिस का कहना है कि मंदिर परिसर में आसिफ़ के साथ मार-पीट करने वाले और उसका वीडियो बनाने वाले दोनों अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया गया है. इस मामले में चूंकि और किसी का नाम नहीं है, इसलिए और कोई कार्रवाई नहीं बनती है.

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