सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गैंग का खुलासा

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एसटीएफ ने सरगना समेत चार आरोपियों को वाराणसी से दबोचा

लखनऊ। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गैंग का खुलासा करते हुए एसटीएफ ने सरगना समेत चार लोगों को जनपद वाराणसी से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया गया है।

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एसटीएफ के मुताबिक मुखबिर से सूचना मिली थी कि रेलवे विभाग, सचिवालय एवं बीएचयू वाराणसी में भर्ती के नाम पर ठगी करने वाले गैंग का सरगना रामानुज भारद्वाज उर्फ सुरेश अपने गैंग के साथियों के साथ थाना सारनाथ रिंगरोड पर सिंहपुर चौराहे के पास मौजूद है ।

घेराबंदी कर दबोचा

कुछ लड़कों को सरकारी नौकरी में भर्ती के नाम ठगी करने के लिये उन्हें बुलाया है। इस सूचना पर निरीक्षक अनिल सिंह के नेतृत्व में एसटीएफ वाराणसी की टीम ने घेराबंदी करते हुए चार लोगों को दबोच लिया। पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम रामानुज भारद्वाज,अजय कुमार गौतम, अनिल भारती व विश्वेश मिश्रा निवासीगण वाराणसी बताया है।

करोड़ों की कर चुके हैं ठगी

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पांच मोबाइल, 8 रेलवे व सचिवालय में कूटरचित नियुक्ति पत्र, एक लैटपाट, तीन बैंक चेक , दो बाइक व 6000 की नकदी बरामद हुई है।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वर्ष 2017 से नौकरी के नाम पर ठगी कर रहे हैं। अब तक करीब 50-60 से करोड़ों रुपये की ठगी की जा चुकी है।

इस तरह फंसाते थे बेरोजगारों को जाल में

गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि सरकारी विभागों से मिलती जुलती फर्जी वेबसाइट बनाकर बेरोजगारों को जाल में फंसाते थे। गिरोह के सदस्य पहले यह पता लगाते थे कि किस-किस सरकारी विभाग में भर्तियां निकली है।

एडवांस में लेते थे कुछ पैसे

भर्तियों का विज्ञापन निकलने के बाद विज्ञापन का स्क्रीनशॉट लेकर इच्छुक अभ्यथियों को व्हाट्सअप पर भेजकर उन्हें फार्म भरने के लिये कहा जाता था। भर्ती करवाने के एवज में तीन से पांच लाख में सौदा तय होता था।

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वहीं एडवान्स के रूप में कुछ पैसा मिलने के उपरान्त अभ्यर्थियों को पूर्व से तैयार की गयी फर्जी वेबसाइट उपलब्ध कराते हुए बताया जाता था कि भर्ती का रिजल्ट वेबसाइट पर घोषित कर दिया गया है और आप लोग अपना-अपना नाम देख लिजिये।

फर्जी नियुक्ति पत्र

वेबसाइट पर नाम देखने के बाद अभ्यर्थियों द्वारा विश्वास करने के उपरान्त शेष पैसा इन्हें दे दिया जाता था। इतना ही नहीं कुछ दिनों के उपरान्त फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर रजिस्टर्ड पोस्ट से भेज दिया जाता था।

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