Corona era: कोरोना काल में आत्मनिर्भर हुआ रिफाइंड और सरसों का तेल, पेट्रोल-डीजल को पीछे छोड़ा

पेट्रोल-डीजल से काफी आगे निकल चुका रिफाइंड और सरसों तेल के दाम, 200 पार होने की अनुमान

दो माह में 22 से 35 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ा भाव, 200 पार होने की अनुमान 

लखनऊ। Lucknow:   पूरे देश में जहां एक ओर कोरोना के कहर ने कोहराम मचा रखा है वहीं दूसरी ओर महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ रखी है।

आलम यह है कि रिफाइंड और सरसों तेल के दाम आत्मनिर्भर होने के साथ ही पेट्रोल-डीजल से कहीं आगे निकल चुके हैं।

कारोबारियोंं की मानें तो कुछ ही दिनों में रिफांइड के दाम 200 पार हो सकते हैं।

बीते दो माह में लोग जब भी रिफाइंड और सरसों का तेल खरीदने किराने की दुकान पर गए हैं उन्हें दाम बढ़े हुए मिले।

जनवरी के बाद से ही तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही है।

पहली बार सरसों का तेल 165 रुपये लीटर पहुंच गया है, जबकि रिफाइंड भी 155 से 160 रुपये के बीच बिक रहा है।

बार-बार दाम बढऩे से आम आदमी परेशान है। अभी ये तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है।

आने वाले समय में रिफाइंड और सरसों तेल के दामों में और तेजी की आशंका जताई जा रही है।

बीते दो माह में रिफाइंड के दामों में 22 रुपए लीटर की तेजी आई है। इसी तरह सरसों के तेल के दाम भी 35 रुपए तक बढ़ गए हैं।

 

गड़बड़ा गया रसोई का बजट

कोरोना महामारी के दौरान महंगाई से रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। सब्जी का दाम कम होता है तो तेल, दाल और रसोई गैस के दाम बढ़ जाते हैं।

तेल की बढ़ती किमतों पर नियंत्रण बहुत जरूरी है, नहीं तो दाम 200 रुपये लीटर के पार पहुंच जाएगा।

आमजन की मानें तो हर माह का रेट फिक्स होना चाहिए। एक ही तेल दो दुकानों पर अलग-अलग कीमतों पर बेचा जा रहा है।

साल भर में 60 फीसद तक बढ़ी कीमत

पिछले साल अप्रैल में रिफाइंड का एक लीटर का पैकेट 90 रुपये का था, जो अब बढ़कर 155 रुपये हो गई है।

इसी तरह सरसों का तेल 105 रुपये लीटर था जो अब 165 रुपये पर पहुंच गया है। दोनों तरह के तेलों में बेहिसाब बढ़ोतरी हो रही है।

कारोबारियों के मुताबिक सोयाबीन की फसल की पैदावार अच्छी न होने के कारण रिफाइंड के दामों पर असर पड़ा है। सरसों के तेल में भी तेजी बनी हुई है।

बढ़ोत्तरी के कारण बढ़ रहा भाव

थोक कारोबारियों के मुताबिक पाम तेल एवं सोया तेल की टैरिफ वैल्यू में बढ़ोतरी के कारण रिफाइंड की कीमतें कम होने के बजाए बढ़ती जा रही है।

रिफाइंड कभी इस कीमत पर नहीं बिका था। दूसरी तरफ सरसों की पैदावार कम और मांग ज्यादा होने के कारण कीमत काबू में नहीं आ पा रही है।

किसी तरह का नियंत्रण न होने से कंपनियां भी मनमाना कीमत वसूल रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.