न्याय के लिए दर दर की ठोकर खाने पर मजबूर

एक तरफ हमारा पूरा देश कोरोनावायरस से जंग लड़ रहा है कि कैसे हम सभी लोग सुरक्षित रहें परंतु यहां पर तो कुछ और ही देखने को मिल रहा है

राजधानी लखनऊ के थाना आलमबाग अंतर्गत ओम नगर क्षेत्र में रहने वाले अभिषेक प्रकाश अवस्थी की है जो दिनांक 10 जुलाई 1986 को न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी शाखा कार्यालय जिला हरदोई में सहायक के पद पर तैनात थे।

बेवजह फंसाया

पीड़ित अभिषेक प्रकाश अवस्थी ने बताया कि फरवरी 2007 में उनका स्थानांतरण  न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी शाखा लखनऊ में कर दिया गया था जून 2007 से लेकर नवंबर 2007 में कार्यालय के अधिकारियों की मिलीभगत से पीड़ित पर ₹156800 के लगभग नगद एवं चेकों की चोरी में बेवजह फंसाया गया ।

निकालने का समीकरण पहले से ही तैयार

पीड़ित ने बताया कि जो ₹156800 नगद और चेकों को इन्हीं अधिकारियों द्वारा पहले ही निकाल लिया गया था उसके बाद मुझको इस जालसाजी में फंसाया गया पीड़ित ने यह भी बताया कि यह सभी आरोपों में मुझे नाजायज तरीके से फंसा कर मुझे नौकरी से निकालने का समीकरण पहले से ही तैयार करके रखे थे।

न्यूज24on

पीड़ित अभिषेक प्रकाश अवस्थी ने बताया कि अधिकारियों की यह टीम एससी वर्ग से संबंधित है अतः दलितों को बचाने के उद्देश्य से स्थानीय कोतवाली हरदोई में चोरी की कोई रिपोर्ट और सूचना भी नहीं दर्ज कराई गई । और अधिकारियों के द्वारा ही स्वयं निर्णय ले लिया गया ।

पुलिस प्रशासन को भनक तक नहीं लगी, इन अधिकारियों को ना तो किसी का ,डर है और ना ही किसी का भय है ये निडर होकर के कर्मचारियों के ऊपर अपना दबाव बना रहे । इन अधिकारियों के भ्रष्ट टीम ही स्वयं न्यायपालिका और कार्यपालिका तथा शासन प्रशासन के न्याय अन्याय के कार्य को अपने हाथों में लेकर पीड़ित के ऊपर दबाव बनाकर उसे सेवा से बर्खास्त करा दिया गया।

अब देखना यह है कि इन उच्च अधिकार, के ऊपर कार्यवाही कब होगी और कब पीड़ित को न्याय मिलेगा।

संवाददाता “बीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव की ख़ास रिपोर्ट”

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