कहीं अपराधियों का पनाहगार तो नहीं आटोमोबाइल बाजार ?

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ऑटो बाजार में बिना पुलिस वेरिफ़िकेशन के काम कर रहे हजारों मैकेनिक, news24on की पड़ताल में समाने आया सच

लखनऊ। अजीत सिंह हत्याकांड के बाद कमिश्नरेट के बाशिन्दों की सुरक्षा के लिए पुलिस लगातार मकान मालिक और दुकानदारों से अपने वर्करों का पुलिस वेरिफ़िकेशन करने पर जोर दे रही है। लेकिन कमिश्नर की पहल का असर धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। रोजाना, करोड़ों का कारोबार करने वाले आॅटो बाजार की स्वतंत्र चेतना अखबार ने तह तक पड़ताल की तो चौंका देने वाली हकीकत उजागर हुई। जिसके संज्ञान में पुलिस कोसों दूर हैं।

मानक के अनुरूप है वर्कर

दरअसल, गोमतीनगर में अजीत सिंह हत्याकांड के बाद लखनऊ पुलिस हरकत में आई थी। इसके बाद कमिश्नर डीके ठाकुर (धुव्रकांत) ने आरोपितों की गिरफ्तारी और शहर में पनप रहे अपराधियों पर लगाम कसने के लिए मकान मालिकों और दुकानदारों से अपने वर्करों का पुलिस वेरिफ़िकेशन कराने के लिए जोर देना शुरू कर दिया। जिसके तहत गोमतीनगर व आसपास अपार्टमेंट के कुछ लोगो ने इस पर अमल भी किया।

तो वहीं ऑटो बाजार कमिश्नर की पहल का माखौल उड़ाता दिखाई दे रहा है। असल में लखनऊ के लालबाग स्थित जयहिन्द मार्केट, स्वरूप पैलेस, जय भारत, लालबाग कार बाजार व सुपर बाजार की 500 ऑटो मोबाइल दुकानों रजिस्टर्ड है। लेकिन इन दुकानों के बाहर में काम करने वाले हजारों वर्करों का वेरिफ़िकेशन पुलिस डायरी से लापता है।

पड़ताल में पता कि एक ऑटो मोबाइल की दुकान से जुडे 15 से 20 मैकेनिक काम कर रहे है। जोकि मानक के विपरीत है। मानक के अनुसार एक दुकान में 3 से 4 लोगों का स्टाफ होता है।

हिस्ट्रीशीटर भी छिपा रहे पहचान

ऑटोमोबाइल बाजार में काम कर रहे एक वर्कर ने सटीक जानकारी देते हुए बताया कि जयहिन्द काम्प्लैक्स समेत अन्य ऑटोबाजार जिला बदर अपराधियों का पनाहगार बन चुका है। तमाम मैकेनिक ऐसे है जिनके खिलाफ गैर जनपदों में हत्या, लूट, चोरी, बलवा और रेप के संगीन मामले दर्ज है।

वह अपनी पहचान छिपाकर ऑटो मोबाइल बाजार में काम कर रहे हैं। जिसके भनक पुलिस को भी नहीं हैं। जोकि किसी वारदात को अंजाम देकर आसानी से फरार हो जाते हैं। पिछले दस सालों में कुछ मामले समाने भी आए हैं। इसके बावजूद दुकानदार दुकान से जुड़े मैकेनिक का डिटेल्स लेने और पुलिस वेरिफ़िकेशन कराने से बचते हैं।

ग्राहकों से होती है मारपीट

आमतौर पर लोग ऑटोमोबाइल बाजार में अपने वाहनों की रिपेयिंग और उन्हे बेचने के मकसद से आते है। तो इसी बीच मैकेनिक ग्राहकों से अभद्रता भी करने लगते है। अक्सर इन बाजार में मैकेनिक और ग्राहकों से मारपीट की घटनाएं सामने आती है। लेकिन मैकेनिक की एक जुटता को देख लोग ख़ौफज़दा रहते हैं। साथ ही महिलाएं से छेड़छाड़ की घटनाएं होती रहती हैं।

वहीं साप्ताहिक बंदी पर इस असर नही दिखाता। जब प्रशासन के आदेश पर रविवार को ऑटोमोबाइल बाजार पूरी तरह से बंद रहता है। फिर भी दबंगई के शह पर लोगो आटोबाजार को बंदी के दिन भी खेलते है। मैकेनिक के रवैये को देख यूनियन के लीडर भी काफी परेशान रहते हैं। सूत्रों की मानें तो यूनियन के कई बार पुलिस को शिकायती पत्र दिया। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की गई।

पुलिस को भी नहीं है जानकारी

ऑटोमोबाइल बाजार में काम कर रहे मैकेनिक के ब्यौरा पता करने के लिए कोतवाली इंस्पेक्टर आनंद प्रकाश शुक्ला से बातचीत की गई। तो आप भी हैरत में पड़ जाएगे कि, संबधित थाना पुलिस को भी मैकेनिक के डिटेल्स की जानकारी नही है। हालांकि उन्होने आश्वासन दिया है कि जल्द पुलिस सभी मैकेनिक का ब्यौरा दर्ज करवाएगी।

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