U.P. Election 2022 : बीएसपी ने 58 में से 53 प्रत्याशियों की पहली सूची की जारी

Spread the love

U.P. Election 2022 : लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 58 में से 53 सीटों पर बीएसपी ने उम्मीदवार घोषित कर दिये हैं।

 

बसपा की ये पहली सूची है। अपनी पहली सूची में पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवारों पर ज्यादा भरोसा जताया है। शनिवार को जन्मदिन पर मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से पूर्ण बहुमत की सरकार बनवाने का तोहफा मांगा है।

उन्होंने कहा है कि कोविड काल में सभी कार्यकर्ता घर से ही मेरा जन्मदिन मना रहे हैं और वह अपने क्षेत्र में ही पार्टी के प्रत्याशियों को भारी मतों से जिताएं। इसके साथ ही 2007 की भांति बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनवाएं।

मायावती ने विधानसभा चुनाव में खुद के लडऩे की खबर पर भी साफ. जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया को मेरे खिलाफ  कोई मुद्दा नहीं मिल रहा है तो वो आये दिन मेरे चुनाव लडऩे के मुद्दे को उछालते रहते हैं।

मैं चार बार लोकसभा और तीन बार राज्यसभा की सदस्य रह चुकी हूं। मैंने अपनी पार्टी के हित में सीधा चुनाव लडऩे की जगह अपने कार्यकर्ताओं को जिताने का काम करूंगी।

वह शनिवार को राजधानी स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बात कर रही थीं। इस मौके पर उन्होंने बीएसपी की ब्लू बुक मेरे संघर्षमय जीवन एवं बीएसपी मूवमेंट का सफरनामा भाग-17 और उसके अंग्रेजी संस्करण का विमोचन भी किया।

उन्होंने कहा कि बसपा किसी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। साथ ही बसपा को इस बार के विधानसभा चुनाव में फिर से जनता वापस जरूर लाएगी।

इसके साथ ही पूर्व की भांति सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के आधार पर सरकार चलेगी। सारे ओपीनियन पोल व सर्वे फेल हो जाएंगे।

इस मौके पर मायावती ने बताया कि पहले चरण की 58 सीटों में 53 पर अपने उम्मीदवार तय कर लिए हैं। उन्होंने साथ ही बताया कि बाकी पांच सीटों पर भी दो से तीन दिन के भीतर फैसला हो जाएगा।

एक अन्य सवाल के जवाब में मायावती ने कहा कि लोग आकाश आनंद के भी चुनाव लडऩे की बात भी मीडिया में उछालते रहते हैं। वो मेरे निर्देशन में पार्टी के काम में लगा है।

अगर मीडिया और विरोधी पार्टी आकाश आनंद के पीछे पड़ते रहे तो मैं उसे अपनी पार्टी में और बढ़ावा दूंगी। आकाश आनंद और सतीश मिश्र के बेटे कपिल मिश्रा भी युवाओं को बीएसपी से जोडऩे में लगे हैं।

मुझे पूरा भरोसा है कि इस बार बीएसपी 2007 की तरह सत्ता में लौटेगी और ओपेनियन पोल धरा का धरा रह जाएगा।

इसके साथ ही मायावती ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी बसपा का किसी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी सर्व समाज के गठबंधन से जीतेगी।

बीएसपी की पहली सूची, 53 उम्मीदवारों में 14 मुस्लिम प्रत्याशी
सपा-रालोद गठबंधन के मुस्लिम प्रत्याशी के सामने मुस्लिम को दिया टिकट
धौलाना, कोल और अलीगढ़ सीटों पर बने ये समीकरण
ब्यूरो

लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव के लिए जारी अपनी पहली लिस्ट में बीएसपी ने मुस्लिम उम्मीदवारों ज्यादा भरोसा जताया है। पहले चरण के मतदान को लेकर पश्चिमी यूपी में 25 फीसदी से ज्यादा टिकट मुस्लिम उम्मीदवारों को दिया है।

बसपा की ओर से जारी 53 उम्मीदवारों की सूची में 14 मुस्लिम प्रत्याशी हैं। खास बात यह है कि सपा और राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन के तीन मुस्लिम प्रत्याशियों के सामने बसपा ने मुस्लिम कैंडिडेट ही उतारा है। यह सीटें हैं धौलाना, कोल और अलीगढ़।

पश्चिमी यूपी और ब्रज क्षेत्र के 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर पहले चरण में वोटिंग होनी है। इसके लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

मायावती ने अपने जन्मदिन के अवसर पर 58 में से 53 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। 53 सीटों में से 14 सीटों पर मायावती ने मुस्लिम उम्मीदवारों की फील्डिंग की है।

U.P. Election 2022 : जिन सीटों पर मुस्लिम कैंडिडेट्स को उतारा गया है उनमें अलीगढ़, कोल, शिकारपुर, गढ़मुक्तेश्वर, धौलाना, बुढ़ाना, चरथावल, खतौली, मीरापुर, सीवालखास, मेरठ दक्षिण, छपरौली, लोनी और मुरादनगर खास है।

विधानसभा                    उम्मीदवारों के नाम

कैराना                                 राजेंद्र सिंह उपाध्याय
शामली                                 ब्रिजेंद्र मलिक
बुढ़ाना                               हाजी मोहम्मद अनीश
चरथावल                                सलमान सईद
पुरकाजी एससी                       सुरेंद्र पाल सिंह
मुजफ्फरनगर                        पुष्पाकर लाल

खतौली                                माजिद सिद्दीकी
मीरापुर                               मोहम्मद शालिम
सिवालखास                  मुकर्रम अली उर्फ नन्हें खां
सरधना                            संजीव कुमार धामा
हस्तिनापुर एससी                   संजीव कुमार जाटव
किठौर                              कुशल पाल मावी
मेरठ कैंट                                अमित शर्मा
मेरठ दक्षिण                        कुंवर दिलशाद अली
छपरौली                                मोहम्मद शाहिन चौधरी
बड़ौत                               अंकित शर्मा
लोनी                              हाजी अकिल चौधरी
मुरादनगर                            हाजी अय्युब इदरीशी
गाजियाबाद                  सुरेश बंसल
मोदीनगर                           पूनम गर्ग
नोएडा                             कृपाराम वर्मा
दादरी                        मनवीर सिंह भाटी
जेवर                      नरेंद्र भाटी डाडा
धौलाना                            वासिद प्रधान
हापुड़                      मनीष कुमार सिंह उर्फ  मोनू
गढ़मुक्तेश्वर                       मोहम्मद आरिफ
सिकंदराबाद            चौधरी मनवीर सिंह
स्याना                      सुनील भारद्वाज
अनूपशहर                   रामेश्वर सिंह लोधी
डिबाई                     करन पाल सिंह उर्फ  केपी सिंह
शिकारपुर                       मोहम्मद रफीक
खुर्जा                              विनोद कुमार जाटव
खैर                          प्रेमपाल सिंह जाटव
बरौली                          नरेंद्र शर्मा
अतरौली                        ओमवीर सिंह
छर्रा                       तिलक राज यादव
कोल                        मोहम्मद बिलाल
अलीगढ़                         रजिया खान
इगलास                      सुशील कुमार जाटव
छाता                       सोनपाल सिंह
मांट                     श्याम सुंदर सिंह
गोवर्धन                        राज कुमार रावत
मथुरा                    जगजीत चौधरी
बलदेव                  अशोक कुमार सुमन
एत्मादपुर                     सर्वेश बघेल
आगरा कैंट              भारतेंदु अरुण
आगरा दक्षिणी              रवि भारद्वाज
आगरा उत्तरी             मुरारी लाल गोयल
आगरा देहात                किरण प्रभा केस
फतेहपुर सीकरी               मुकेश कुमार राजपूत
खेरागढ़                        गंगाधर सिंह कुशवाहा
फतेहाबाद                      शैलेन्द्र प्रताप सिंह
बाह                            नितिन शर्मा

सपा से नहीं बनी बात, अकेले चुनाव लड़ेगी आजाद समाज पार्टी
चंद्रशेखर ने कहा दलित विरोधी हैं अखिलेश, नहीं चाहते हैं गठबंधन
मैंने एक महीने तीन दिन कोशिश की लेकिन नहीं हो सका गठबंधन

लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव में बनते-बिगड़ते समीकरण के बीच अखिलेश यादव और आजाद समाज पार्र्टी के मुखिया चंद्रशेखर में आखिरकार बात नहीं बन पायी। अब सपा और चंद्रशेखर की पार्टी के बीच गठबंधन नहीं होगा।

भीम आर्मी चीफ  चंद्रशेखर ने शनिवार को पे्रस कान्फ्रेंस कर इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उनकी आजाद समाज पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ेगी।

अखिलेश यादव को दलित विरोधी बताते हुए कहा कि सपा प्रमुख खुद गठबंधन नहीं चाहते। हमने यह तय किया कि हम समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में नहीं जा रहे हैं। हम सड़कों पर खुद लड़े हैं। हम मानते हैं दलितों के हितों की रक्षा स्वंय करनी होगी।

चंद्रशेखर ने कहा कि मेरी अखिलेश यादव से पिछले 6 महीनों में काफी मुलाकातें हुई हैं। इस बीच सकारात्मक बातें भी हुईं लेकिन अंत समय में मुझे लगा कि अखिलेश यादव को दलितों की जरूरत नहीं है।

वह इस गठबंधन में दलित नेताओं को नहीं चाहते। वह चाहते हैं कि दलित उनको वोट करें। मेरा डर यह है कि अगर दलित वोट कर देंगे तो सरकार बनने के बाद हम अपने विषयों पर बात ही न कर पाएं।

भीम आर्मी चीफ  चंद्रशेखर ने अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनका अपमान किया है। उन्होंने बहुजन समाज के लोगों को अपमानित किया। मैंने एक महीने 3 दिन कोशिश की लेकिन गठबंधन नहीं हो सका।

आजाद ने कहा कि बीजेपी को रोकने के लिए मैंने अपने स्वाभिमान से समझौता किया लेकिन हमारे कार्यकर्ता भी नहीं चाहते थे। वो अपने हितों की लड़ाई खुद लडऩा चाहते हैं। मेरा काम है जो बंटा हुआ विपक्ष है, उसे एकजुट करुंगा।

बात हिस्सेदारी की है जितनी संख्या हमारी, उतनी हिस्सेदारी भी। हम अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे। बिखरा हुआ विपक्ष है, उसे एकत्रित करने की कोशिश करेंगे।

मैंने सबसे पहले बहन जी से प्रयास किया और फिर भैया जी से बात की लेकिन वो चाहते नहीं हैं। मैंने उनसे कहा कि आप हमारे बड़े भाई हैं। मैंने उनसे कहा था कि आप बड़े भाई हैं,

आप तय कर लें लेकिन उन्होंने मुझे नहीं बुलाया। कल आने के बाद मैंने अखिलेश यादव जी पर जिम्मेदारी तय की थी आप तय कर लें। बात सीट की नहीं है।

बात हमारे हितों की रक्षा की है। हमने यह तय किया है हम समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में नहीं जा रहे हैं।

U.P. Election 2022 : 58 सीटों पर दूसरे दिन भी सिर्फ कैराना में नामांकन

लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव के पहले चरण में जिन 58 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया चल रही है, उसमें दूसरे दिन भी कैराना सीट से ही एक और नामांकन हुआ। अभी तक सिर्फ दो नामांकन हुए हैं।

दोनों कैराना विधानसभा सीट से हैं। पश्चिमी यूपी की जिन 11 जिलों की 58 सीटों के लिए नामांकन होने हैं उनमें से 9 सीटें आरक्षित हैं।

एक सीट छोड़ दें तो 57 सीटों पर अभी तक खाता नहीं खुल पाया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि पहले चरण में यूपी की 58 सीटों में से दो दिन में सिर्फ कैरादो नामांकन हुए हैं।

स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर मायावती का पलटवार कहा, बसपा में आने के बाद मौर्य की किस्मत खुली, बीजेपी वाले तो पांच साल तक उसको ढोते रहे दलित संतों के नाम पर शुरु की गईं जनकल्याणकारी योजनाओं को भी सपा सरकार ने बदल दिया था

लखनऊ। अपने जन्मदिन पर लोगों की बधाई लेने के साथ ही मायावती ने आभार भी जताया लेकिन उसके बाद विरोधियों पर जमकर बरसीं। सपा के साथ ही वो स्वामी प्रसाद मौर्या पर भी हमलावर हुईं।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने पहले मायावती पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि उनके पार्टी छोडऩे के कारण बसपा की दुर्गति हुई है।

अब पलटवार मायावती की ओर से हुआ है। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी में आने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य की किस्मत खुली। आज वे तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। बीजेपी वाले तो पांच साल तक उसको ढोते रहे।

मायावती ने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा में शामिल होने के मौके पर दिए गए भाषण का भी बसपा प्रमुख ने जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि दलबदलू नेता चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे थे, समाजवादी पार्टी अंबेडकरवादी पार्टी है। इनमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है।

समाजवादी पार्टी ने ही दलितों की पदोन्नति के मामले में विधेयक को फाड़ कर फेंक दिया था जो अभी तक लटका हुआ है। दलित संतों के नाम पर जिलों और जन कल्याणकारी योजनाओं को शुरू किया गया था उसे भी सपा सरकार ने बदल दिया।

भदोही को संत रविदास नगर रखने के आदेश को पलटने पर भी बसपा सुप्रीमो ने करारा हमला बोला। बसपा प्रमुख ने समाजवादी पार्टी को यादवों की पार्टी होने का आरोप लगाया।

उन्होंने पूर्व की सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि चार बार हमारी सरकार बनी। हमने समाज के हर तबके के विकास का कार्य किया लेकिन समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार में केवल यादवों के लिए काम किया गया।

उन्होंने मुसलमानों को वोट तो लिया लेकिन उनके लिए काम नहीं किया। सपा की पहली सूची देख लें, मुसलमानों की उपेक्षा की गई है। बसपा उम्मीदवारों की सूची में अल्पसंख्यकों का ध्यान रखा गया है।