खाकी का दामन दागदार कर रहे रिश्वतखोर पुलिस !

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रुपये लेती है तो काम भी ईमानदारी से करती है….पुलिस

लखनऊ। पुलिस की रिश्वतखोरी के किस्से और कहानियां जग जाहिर है । चंद रुपयों के लिए कुछ पुलिसकर्मी खाकी को दागदार करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। चाहे इसके लिए पूरे विभाग को ही शर्मसार क्यों न होना पड़े।

वहीं लोगों की अवधारणा भी है कि यदि किसी कर्मी ने रिश्वत ले लिया तो काम होना लगभग पूरा तय मान लिया जाता है।

आलम यह है कि रिश्वत लेने के मामले में हर विभाग अपने-अपने तरीके से कसीदे भी पढ़ता है। खास बात यह है कि पुलिस विभाग अन्य विभागों से एक कदम आगे है।

बीते दिनों पुलिस की ईमानदारी की यह कसीदे किसी और ने नहीं बल्कि उन्नाव के एक दारोगा उमेश त्रिपाठी ने एक स्कूल के कार्यक्रम में बच्चों के सामने खुले मंच पर माइक से कह कर पूरे विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया था। जिसका वीडियो वायरल हुआ था।

वायरल वीडियो में दारोगा जी कह रहे हैं कि पुलिस से ईमानदार कोई विभाग नहीं है पुलिस अगर पैसा लेती है तो काम भी करती है जबकि अन्य विभागों में ऐसा नहीं है वहां के लोग पैसा लेने के बाद भी दौड़ाते हैं। हालांकि मामले में दारोगा को निलंबित भी होना पड़ा था।

सवाल यह है कि अपने मातहतों की इमानदारी की जानकारी आलाधिकारियों को होते हुए भी वह अपनी आंखे बंद रखते हैं। वहीं जब कोई मामला आता है तो निलंबन व लाइन हाजिर की कार्रवाई कर खानापूर्ति कर दिया जाता है। एक ओर दिनदहाड़े अपराधिक घटनाएं तो दूसरी ओर रिश्वतखोरी के बढ़ते मामले पूरे विभाग पर सवाल दाग रहे है ।

सिपाही से लेकर अफसर तक लगा रहे खाकी पर दाग

सरकार पुलिस को हाईटेक बनाने के साथ ही आम जनता में मित्र पुलिस की बेहतर छवि बनाने के लिए प्रयासरत है। समय-समय पर पुलिस के जिम्मेदार अफसरों द्वारा नवनियुक्ति पुलिसकर्मियों को नैतिकता का पाठ भी पढ़ाया जाता है। बावजदू इसके चंद पुलिसकर्मी खाकी को दागदार करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।

सिपाही से लेकर थानेदार। यहां तक आलाधिकारी भी पीछे नहीं हैं। बताते चले कि महोबा के तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार करीब डेढ़ साल से फरार हैं। उन पर एक लाख का इनाम घोषित है। मणिलाल पाटीदार पर क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी की हत्या और वूसली समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज है।

केस::1:::: दारोगा का रिश्वत लेते वीडियो वायरल

गत माह 21 जून को मडिय़ांव कोतवाली की अजीज नगर चौकी पर तैनात दारोगा संतोष सिंह का एक वीडियो ट्विटर व वॉट्सएप पर वायरल हुआ। इसमें दारोगा दो पक्षों में समझौता कराने के लिए रिश्वत लेते नजर आ रहे हैं। इस वायरल वीडियो के आधार पर डीसीपी उत्तरी ने दरोगा को निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि दारोगा संतोष का दो माह बाद प्रमोशन होना था।

केस 2:::::: एंटी करप्शन टीम ने दारोगा को रंगे हाथ दबोचा

गत माह 15 जून को रिश्वत लेते रंग हाथ चिनहट कोतवाली में तैनात दारोगा प्रदीप यादव
भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दौरान टीम और थाना पुलिस में कहासुनी हुई थी। दारोगा को ट्रैप करने वाली एंटी करप्शन टीम का आरोप है कि इंस्पेक्टर चिनहट ने उनके साथ थाने में दुव्र्यवहार किया और कार्रवाई में बाधा पहुंचाई।

ट्रैप टीम की रिपोर्ट पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन के डीआईजी राजीव मल्होत्रा ने पुलिस आयुक्त को चिनहट इंस्पेक्टर के खिलाफ  कार्रवाई के लिए लिखा है। मामले में पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने इंस्पेक्टर चिनहट को फटकार भी लगाई थी।

केस::3:::: वसूली का रुपये लेते हुए सिपाही का वीडियो वायरल

गत माह 26 जून को बीबीडी कोतवाली में तैनात सिपाही विकास तिवारी का वसूली का रुपया लेते हुए वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में नो-एंट्री प्वाइंट पर सिपाही डीसीएम चालक से पैसे लेते हुए दिख रहा है।

मामले में बीबीडी इंस्पेक्टर अतुल सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो पुराना है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। बताते चलें कि इससे पहले जेसीपी लॉ एंड ऑर्डर पीयूष मोर्डिया ने औचक निरीक्षण कर कानपुर रोड नो-एंट्री प्वाइंट से यातायात में तैनात सिपाही और होमगार्ड को पैसा लेते हुए पकड़ा था।

कार्रवाई भी हुई थी लेकिन चंद रुपयों के लिए खाकी का दामन दागदार करने का सिलसिला जारी है।

केस::4::: सीओ से रिश्वत लेते समय इंस्पेक्टर हुए थे गिरफ्तार

बीते साल 30 दिसंबर को लखनऊ के बिजनौर थाने में तैनात इंस्पेक्टर राधेश्याम यादव को एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। पुलिस विभाग के ही रिटायर्ड सीओ से इंस्पेक्टर ने एक मामले में धारा बढ़ाने के एवज में पांच हजार की रिश्वत मांगी थी।

गौरतलब है कि ईओडब्ल्यू से सेवानिवृत्त सीओ बीएल दोहरे से मंडी परिषद का अध्यक्ष बनाने के नाम पर 20 लाख रुपये की ठगी की गई थी। मामले में सरोजनीनगर थाने में केस दर्ज कराया था,लेकिन ये मामला नवसृजित थाना बिजनौर में ट्रांसफर  हो गया और इसकी जांच इंस्पेक्टर राधेश्याम यादव कर रहे थे। इंस्पेक्टर आरोपियों के खिलाफ  कार्रवाई करने के लिए रुपये मांगे थे।