Jitin Prasada : जाने वाले जाते रहते हैं, हम उन्हें रोक नहीं सकते.”Congress के जितिन प्रसाद BJP में शामिल

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Jitin Prasada : नई दिल्ली. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे (Congress MP Mallikarjun Kharge) ने जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) के भाजपा में शामिल होने पर कहा. “जाने वाले जाते रहते हैं, हम उन्हें रोक नहीं सकते.” खडगे ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया. खड़गे ने कहा, “यह उनका फैसला था, उनका यहां कांग्रेस पार्टी में भी भविष्य था.

हालांकि जो भी हो यह दुर्भाग्यपूर्ण है.” बता दें लंबे समय से कांग्रेस से नाराज चल रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री और युवा नेता जितिन प्रसाद ने बुधवार को भाजपा का दामन थाम लिया. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए इसे एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है.

Jitin Prasada : राजनीतिक जीवन का एक नया अध्याय शुरु

भाजपा में शामिल होने के बाद प्रसाद ने पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा से मुलाकात की. इससे पहले उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. प्रधानमंत्री मोदी, शाह और नड्डा को धन्यवाद देते हुए प्रसाद ने कहा कि उन्होंने बहुत विचार-मंथन के बाद यह फैसला लिया है. उन्होंने कहा, ‘‘आज से मेरे राजनीतिक जीवन का एक नया अध्याय शुरु हो रहा है.’’

भगवा दल में शामिल होने की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अनुभव किया कि अगर देश में असली मायने में कोई राजनीतिक दल है तो वह भाजपा ही है. उन्होंने कहा, ‘‘बाकी दल तो व्यक्ति विशेष और क्षेत्र विशेष के होकर रह गए हैं. आज देश हित के लिए कोई दल और नेता सबसे उपयुक्त है और वह मजबूती के साथ खड़ा है तो वह भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं.’’

प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी नि:स्वार्थ भाव से भारत की सेवा कर रहे हैं और सभी चुनौतियों का डट कर मुकाबला कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘वह जिस नये भारत का निर्माण कर रहे हैं उसमें मुझे भी छोटा सा योगदान आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए करने को मिलेगा. यह विचार करके मैं आज इस निर्णय (भाजपा में शामिल होने के) पर पहुंचा हूं.’’
प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस में रह कर वह जनता के हितों की रक्षा नहीं कर पा रहे थे इसलिए वहां बने रहने का कोई औचित्य नहीं था.

लोकसभा चुनाव के दौरान थीं भाजपा में शामिल होने की अटकलें
जितिन प्रसाद के पिछले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भी भाजपा में जाने की अटकलें थीं. कहा जाता है कि तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मनाने पर प्रसाद ने उस वक्त भाजपा में जाने का फैसला त्याग दिया था.
ज्ञात हो कि जितिन प्रसाद उन 23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने पिछले साल कांग्रेस में सक्रिय नेतृत्व और संगठनात्मक चुनाव की मांग को लेकर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी.

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पत्र से जुड़े विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की कांग्रेस कमेटी ने प्रस्ताव पारित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, जिसे लेकर विवाद भी हुआ था. हालांकि बाद में प्रसाद ने कहा था कि उन्हें कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व में पूरा विश्वास है.
ऐसा रहा है जितिन प्रसाद का राजनीतिक करियर
जितिन प्रसाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे जितेंद्र प्रसाद के पुत्र हैं जिन्होंने पार्टी में कई अहम पदों पर अपनी सेवाएं दी थीं. उन्होंने सोनिया गांधी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ा था.

जितिन प्रसाद ने 2004 में शाहजहांपुर से पहली बार लोकसभा का चुनाव जीता था और उन्हें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में इस्पात राज्यमंत्री बनाया गया था. इसके बाद उन्होंने 2009 में धौरहरा सीट से जीत दर्ज की. इसके बाद उन्होंने संप्रग सरकार में पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस, सड़क परिवहन और राजमार्ग और मानव, संसाधन विकास राज्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने वाले जितिन प्रसाद को 2014 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में तिलहर सीट से हाथ आजमाया लेकिन इसमें भी उन्हें निराशा ही मिली.
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी धौरहरा से वह हार गये थे.

उन्हें कुछ महीने पहले पश्चिम बंगाल के लिए कांग्रेस प्रभारी बनाया गया था. वहां राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और वाम दलों के गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा. कांग्रेस एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई.

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