प्रधानमंत्री मोदी का विपक्ष और आंदोलनजीवियों पर निशाना, कहा- ना खेलब ना खेले देइब… खेल बिगाड़ब, इनका यही मंत्र

नए कृषि कानूनों के विरोध में सड़क से संसद तक जारी संग्राम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात रखी। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी तौर पर कांग्रेस पर करारा हमला बोला। साथी ही देशवासियों से आंदोलनकारियों और आंदोलनजीवियों में बात करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने नए कृषि कानूनों के लाभ भी गिनाए। उन्होंने कहा कि 21 वीं सदी में 18 वीं सदी की सोच नहीं चल सकती। मौजूदा वख्त में कृषि को आधुनिक बनाना जरूरी है। बाजार के मुताबिक कृषि क्षेत्र में निवेश करने के लिए प्रयास करने के लिए ही होंगे।

किसानों का आंदोलन को मैं पवित्र 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं किसानों के आंदोलन को लेकर पवित्र मानता हूं। भारत के लोकतंत्र में आंदोलन का महत्व है लेकिन जब आंदोलनकारी पवित्र आंदोलन को अपने लाभ के लिए अपवित्र करने निकल पड़ते हैं तो देश ने देखा कि क्या होता है? मैं पूछना चाहता हूं कि आंदोलन में आतंकवादियों और नक्सलियों के रिहाई की मांग क्यों की जा रही है।

आंदोलनकारियों ने अपवित्र किया आंदोलन 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसानों के पवित्र आंदोलन को बर्बाद करने का काम आंदोलनकारियों ने नहीं किया है, आंदोलनकारियों ने किया है। दंगा करने वालों, सम्प्रदायवादी, आतंकवादियों जो जेल में हैं, उनकी फोटो के साथ उनकी मुक्ति की मांग करना, इन किसानों के आंदोलन को अपवित्र करना है।

सही बात कहने वाले लोग लोग नफरत से नफरत करते हैं

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सही बात कहने में कोई स्पष्ट नहीं हैं। लेकिन देश में एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जिसके लोग सही बात कहने वालों से नफरत करते हैं। ये बातें को सिर्फ बोलने में विश्वास रखते हैं। अच्छा करने मे उन्हें भरोसा ही नहीं है।

आंदोलनकारियों और आंदोलनकारियों में समझ है 

प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रेकफोड़ करने से आंदोलन कलंकित होता है। पंजाब में टेलिकॉम के टावरों को तोड़ा जा रहा है। आखिरकार इन टावरों को तोड़ने का किसान आंदोलन से क्या संबंध है। देश को आंदोलनकारियों और आंदोलनजीवियों में बात को समझना होगा।

खेलब ना खेले देइब, खेलिए बिगाड़ब 

पीएम मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, एक पुरानी कहावत है खेलब ना खले देइब, खेलिए बिबलेबब। आज प्रगति के चक्टके को रोकने के लिए यही चल रहा है। विपक्ष इसी मंत्र पर काम कर रहा है।

तारककी के लिए केंद्रीय क्षेत्र भी आवश्यक है 

पीएम मोदी ने कहा कि देश का सामर्थ्य बढ़ाने में सभी का सामूहिक योगदान है। जब सभी देशवासियों का पीठ लगता है, तो देश आगे बढ़ता है। देश के लिए व्यक्तिगत क्षेत्र आवश्यक है तो प्राथमिक क्षेत्र का योगदान भी आवश्यक है। आज देश मानवता के काम आ रहा है तो इसमें प्राइवेट सेक्टर का भी बहुत बड़ा योगदान है।

कोरोना काल में भी नहीं थमने दिया विकास का पहिया 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोरोना काल में भी सरकार ने विकास का पहिया नहीं थमने दिया। हम कृषि क्षेत्र के लिए नए कानून लेकर आए हैं। नए कृषि कानूनों के मुताबिक किसानों को एक वैकल्पिक व्यवस्था मिली है। इंट नेक हो तो परिणाम गुडे मिलते हैं। नए कृषि कानून किसानों के लिए ऋण नहीं हैं। कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। नए कानूनों से कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन होंगे।

किसान रेल चलती-फिरती एक कोल्ड स्टोरेज 

हमने कोरोना काल में किसान रेल का प्रयोग किया है। यह ट्रेन चलती-फिरती एक कोल्ड स्टोरेज है। दूसरा महत्वपूर्ण काम जो हमने किया है, वह 10,000 एफपीओ बनाने का है। ये छोटे किसानों के लिए एक बहुत बड़ी ताकत के रूप में उभरने वाले हैं। महाराष्ट्र में एफपीओ बनाने का विशेष प्रयोग हुआ है। केरल में भी कम्युनिस्ट पार्टी के लोग काफी मात्रा में एफपीओ बनाने के काम में लगे हुए हैं। यह 10,000 एफपीओ बनने के बाद छोटे किसान ताकतवर बन जाएगा, ये मेरा विश्वास है।

परतंत्रता की दुर्गंध आती है यह ठीक नहीं है 

पीएम मोदी ने कहा कि सरदार पटेल करते थे कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी अगर संकीर्णता की दुर्गंध आती रही, तो स्वतंत्रता की निष्ठा फैल नहीं सकती। जब तक हमारे छोटे किसानों को नए अधिकार नहीं मिलते तब तक पूर्ण आजादी की उनकी बात अधूरी रहेगी। मौजूदा वख्त में कृषि को आधुनिक बनाना जरूरी है। बाजार के मुताबिक कृषि क्षेत्र में निवेश करने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। छोटे किसानों को अधिकार मिलना चाहिए। कोई भी नहीं चाहता है कि किसान गरीबी के कारण हचक्र में फंसा रहा हो।

21 वीं सदी में 18 वीं सदी की सोच सही नहीं है 

पीएम मोदी ने कहा कि नए कृषि कानून की राजनीति का विषय नहीं … यह देश की भलाई के लिए है। 21 वीं सदी में 18 वीं सदी की सोच नहीं चल सकती। किसानों को एक लंबी यात्रा के लिए तैयार होना होगा। हमने बीज से लेकर बाजार तक की व्यवस्थाओंथा बदली है। सरकार की मंशा लोक कल्लयाण की है। हमारे यहाँ कृषक समाज की सम्बद्धता का हिस्सा रहा है। हमारे त्योहार, त्योहार सब चीजें फसल बोने और काटने के साथ जुड़ी रही हैं। हमारा किसान आत्मनिर्भर बन गया, उसे अपनी उपज बेचने की आजादी मिली, उस दिशा में काम करने की आवश्यकता है।

अजीब तर्क दिया जा रहा है- हमने मांगा नहीं तो आपने क्यों दिया  

पीएम मोदी ने कहा कि मुझे आश्चर्य है कि पहली बार एक नया तर्क आया है कि हमने मांगा नहीं तो आपने क्यों दिया। दहेज हो या तीन तलाक, किसी ने इसके लिए कानून बनाने की मांग नहीं की थी, लेकिन प्रगतिशील समाज के लिए आवश्यक होने के कारण कानून बनाया गया। मांगने के लिए मजबूर करने वाली सोच लोकतंत्र की सोच नहीं हो सकती है। देश की जरूरत के अनुसार निर्णय के लिए निर्णय होना चाहिए। नए कृषि कानूनों के मुताबिक किसानों को एक वैकल्पिक व्यवस्था मिली है।

पूछता है कि नए कानून ने छीना है तो जवाब नहीं मिलता है  

पीएम मोदी ने कहा कि कानून बनने के बाद किसी भी किसान से मैं पूछना चाहता हूं कि पहले जो हक और व्यवस्थाएं उनके पास थीं, उनमें से भी कुछ इस नए कानून ने छीन लिया है? इसका जवाब कोई देता नहीं है, क्योंकि सबकुछ वैसा का वैसा ही है। कानून लागू होने के बाद न देश में कोई मंडी बंद हुई, न हील बंद हुआ।यह सच्चाई बहुत ही नहीं है। ये कानून बनने के बाद एमएसपी की खरीद भी बढ़ी है।

 

ये हमामा एक सोची समझीशी का नतीजा  

 

संसद में ये हो-हल्ला, ये आवाज़, ये रुकावटें डालने का प्रयास, एक सोची समझी रणनीति के तहत हो रहा है। स्पर्श ये है कि जो झूठ, अफवाहें फैलाई गए हैं, हंगामा करके उसे मजबूत करें ताकि कहीं उसका पर्दाफाश ना हो जाए। इसलिए हो-हल्ला मचाने का खेल चल रहा है। यह सच्चाई को रोकने के लिए हो रहा है। यह जो झूठ फैलाया गया है उसके लिए किया जा रहा है। कृषि कानूनों पर अफवाह फैलाई गई जिसका शिकार हमारे किसान भाई हुए।  

कोरोना काल में भी देश ने हिम्मत नहीं हारी  

दुनिया के सामने हम मजबूती से खड़े हैं 

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना संकट काल में देश ने अपना रास्ता चुना और आज हम दुनिया के सामने मजबूती से खड़े हैं। इस दौरान भारत सभी भ्रमों को तोड़कर आगे बढ़ा है। आक्रममनिर्भर भारत ने एक के बाद एक कदम उठाए हैं। यही नहीं भारत ने दुनिया के बाकी देशों की भी मदद की है। आक्रममनिर्भर भारत ने एक के बाद एक कदम उठाए हैं। यही नहीं भारत ने दुनिया के बाकी देशों की भी मदद की है। देश जब आजाद हुआ, जो आखिरी ब्रिटिशधरर थे, वह आखिरी तक यही कहता रहा कि भारत कई देशों का महाद्वीप है और कोई भी इसे एक राष्ट्र नहीं बना पाएगा। लेकिन भारतवासियों ने इस आशंका को तोड़ा। विश्व के लिए आज हम आशा की किरण बनकर खड़े हुए हैं।

 

 

 

 

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