BJP नेताओं के बयान से किसान नाराज

नई दिल्ली : कुछ नेताओं की तरफ से ऐसे बयान भी दिए जा रहे हैं जो विवाद का केंद्र बन गए हैं. खासकर बीजेपी नेताओं के बयान में किसान आंदोलन पर ही सवाल उठाए जा रहे हैं सत्तापक्ष लगातार किसान आंदोलन पर सवाल उठा रहा है

कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन को लेकर तमाम किस्म की बयानबाजी हो रही हैं. आंदोलन की आत्मा तक पर सवाल उठाए जा रहे हैं. खासकर, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की तरफ से ऐसे बयान दिए जा रहे हैं जो किसानों की नाराजगी को हवा दे रहे हैं. ताजा बयान मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल का है जिन्होंने प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों को ‘कुकुरमुत्ता’ कहकर संबोधित किया है.

कमल पटेल के इस बयान पर किसानों में नाराजगी

कमल पटेल ने कहा, ”ये किसान संगठन ‘कुकुरमु्त्तों’ की तरह उग आए हैं. ये किसान नहीं हैं, बल्कि व्हीलर डीलर और एंटी नेशनल हैं.” कमल पटेल के इस बयान पर किसानों में नाराजगी है.

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के इस बयान पर किसानों में नाराजगी

वही केंद्र में मोदी सरकार के मंत्री भी आंदोलन को लेकर ऐसा बयान दे चुके हैं जो चर्चा और विवाद का केंद्र बने. किसान संगठनों के साथ मीटिंग करने वाले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि ये आंदोलन अब किसानों का नहीं रह गया है, क्योंकि इसमें वामपंथी और माओवादी तत्व शामिल हो गए हैं. गोयल ने कहा था कि आंदोलन के जरिए ऐसे लोगों की जेल से रिहाई की मांग की जा रही हैं जो राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए सजा काट रहे हैं. कुछ लोगों की तरफ से कहा जा रहा है कि किसान आंदोलन को लेफ्टिस्टों ने हाईजैक कर लिया है

केंद्रीय मंत्री राना साहेब के इस बयान पर किसानों में नाराजगी

केंद्रीय मंत्री रानासाहेब दानवे भी किसान आंदोलन को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं. दानवे महाराष्ट्र के जालना में आरोग्य केंद्र के उद्घाटन के लिए गए थे, यहां उन्होंने मंच से भाषण देते हुए कहा था कि देश में जो किसान आंदोलन चल रहा है उसके पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ है. इतना ही नहीं, आंदोलन के साथ आतंकवाद और खालिस्तान का दाग भी लगाया जा रहा है. इस बात को लेकर हर तरफ नाराजगी भी देखी जा रही है कि किसान आतंकवादी या खालिस्तानी कैसे हो सकता है.

बीजेपी नेता सत्यदेव पचौरी के इस बयान पर किसानों में नाराजगी

कानपुर से लोकसभा सांसद और बीजेपी नेता सत्यदेव पचौरी भी कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर चले आंदोलन पर सवाल उठा चुके हैं. पचौरी ने एक बयान में कहा है कि किसान आंदोलन के जरिए खालिस्तान समर्थक फिर से अपने पैर जमा रहे हैं और इन लोगों के मंसूबे विध्वंसकारी हैं. पचौरी ने यहां तक कहा कि जिनके जरिए इंदिरा गांधी को मारा गया था, कांग्रेस उनके ही साथ है. पचौरी ने ये भी कहा कि कुछ राष्ट्रविरोधी ताकतें इस आंदोलन से जुड़ रही हैं.

कुल मिलाकर सरकार और सत्ताधारी दल की तरफ से कई ऐसे बयान सामने आ चुके हैं जो किसान आंदोलन की विश्वसनीयता और नीयत पर ही सवाल खड़े रहे हैं. किसान नेता भी कह रहे हैं कि सरकार आंदोलन में फूट डालना चाहती है सरकार ने आंदोलन को भड़काने और फूट डालने की पूरी कोशिश की है लेकिन हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और हम आंदोलन को जीत तक जारी रखेंगे.

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