3 महीने इस्तेमाल नहीं करने पर क्या रद्द हो जाएगा राशन कार्ड?

कई दिनों से न्यूज वेबसाइट और सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हुई, जो आपके राशन कार्ड के नए नियम से संबंधित थी. इसमें दावा किया गया था कि केंद्र सरकार ने राशन कार्ड को लेकर कुछ नए नियम बनाए हैं. इसमें कहा गया है कि अगर आप अपने राशन कार्ड का तीन महीने तक इस्तेमाल नहीं करेंगे तो उसे रद्द कर दिया जाएगा.

भारत सरकार की तरफ से जारी नए नियम के मुताबिक अगर किसी शख्स ने 3 महीने तक राशन कार्ड (Ration Card) का इस्तेमाल नहीं किया तो यह मान लिया जाएगा कि वह व्यक्ति अब सक्षम है. ऐसे में उसे राशन की जरूरत नहीं है और उसका राशन कार्ड रद्द कर दिया जाएगा.

अब सरकार की तरफ से इसे लेकर स्पष्टीकरण जारी किया गया है. इसमें यह कहा गया है कि यह दावा फर्जी है और सरकार की तरफ से राशन कार्ड के नियमों (Ration Card New Rules) में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी तीन महीने की बात वाली खबर बेबुनियाद और गलत है.

इससे पहले सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा था, जिसमें दावा किया जा रहा था कि भारत सरकार देश के सभी छात्रों को मुफ्त में लैपटॉप दे रही है. मैसेज से साथ एक वेबसाइट का लिंक भी दिया गया है. हालांकि यह न्यूज फेक है और मोदी सरकार इस तरह की कोई योजना नहीं चला रही है. PIB की तरफ से ट्वीट कर बताया गया कि सरकार ने ऐसी कोई योजना शुरू नहीं की है और यह दावा गलत है.

इससे पहले एक टेक्स्ट मैसेज वायरल हो रहा था, जिसमें दावा किया जा रहा था कि प्रधानमंत्री पेंशन योजना के तहत आपको 70 हजार रुपये मिलेंगे. ये मैसेज लोगों के मोबाइल पर आ रहे थे, जिसमें दावा किया जा रहा है कि आप प्रधानमंत्री पेंशन योजना के तहत 70 हजार रुपये पाने के हकदार है. हालांकि इस मैसेज की जब पड़ताल की गई तो यह गलत पाया गया. PIB ने यह दावा भी गलत पाया.

सरकार की तरफ से बार-बार अपील की जाती रही है कि जब तक आधिकारिक घोषणा न हो तब तक भ्रामक खबरों (Fake News) पर यकीन नहीं करें. इसके लिए PIB की तरफ से Fact Check की भी शुरुआत की गई है. इसका उद्देश्य लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना और भ्रामक खबरों के खिलाफ सचेत करना है. पीआईबी ने इस दावे को क्रॉस चेक किया और पाया कि यह जानकारी फर्जी है.

ज्ञात करा दें कि प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने इंटरनेट पर प्रचलित गलत सूचनाओं और फर्जी खबरों को रोकने के लिए दिसंबर 2019 में इस तथ्य-जांच विंग को लॉन्च किया. पीआईबी का उद्देश्य ‘सरकार की नीतियों और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर प्रसारित होने वाली योजनाओं से संबंधित गलत सूचना की पहचान करना है.’

 

 

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