UP Police 2020 : सालभर सवालों में घिरी रही खाकी, आईपीएस अफसरों ने सरकार और महकमें की कराई फजीहत

सरकार और महकमें की आईपीएस अफसरों ने कराई फजीहत, कई आईपीएस अफसरों पर इनाम घोषित, कुर्की की कार्रवाई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस हमेशा किसी न किसी वजह से सुर्खियों में बनी रहती है,लेकिन वर्ष 2020 में सिपाही से लेकर आईपीएस अफसरों ने सरकार और खाकी को दागदार करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ा। हालांकि सरकार के सख्त तेवर के चलते कई पुलिसकर्मियों और आईपीएस अफसरों पर गाज भी गिरी। इतना ही नहीं फरार आईपीएस अफसरों पर इनाम घोषित से लेकर कुर्की की कार्रवाई भी प्रचलित है।


वर्ष की शुरूआत माह जनवरी में गौतमबुद्नगर के तत्कालीन एसएसपी वैभव कृष्ण के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर कथित वीडियो काण्ड से महकमे में हड़कंप मच गया। साइबर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी) की जिस रिपोर्ट को आधार बनाकर एसएसपी ने पांच आईपीएस अफसरों पर संगीन आरोप लगाए गये। इस रिपोर्ट में न केवल चुनिंदा आईपीएस अफसरों के नाम शामिल थे ,बल्कि 9 हेड कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर तक के नाम थे। भष्टïाचार मामले में आरोपित अफसरों को हटाते हुए जांच के लिए एसआईटी बनाई गई। आरोपित अफसरों में रामपुर के तत्कालीन एसपी अजय पाल शर्मा, गाजियाबाद के तत्कालीन एसएसपी  सुधीर कुमार सिंह,बांदा के तत्कालीन एसपी गणेश शाहा, सुल्तानपुर के तत्कालीन एसपी हिमांशु कुमार व एसटीएफ में तैनात एसएसपी राजीव नारायण मिश्रा के नाम शामिल थे। वहीं एसआईटी ने सुधीर, गणेश व राजीव को क्लीन चिट दे दी। जबकि अजय पाल व हिमांशु के खिलाफ विजिलेंस जांच चल रही है।

 

उधर महोबा के तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार पर क्रशर व्यापारी पर वसूली और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। मणिलाल पर हत्या  समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज है। फिलहाल पाटीदार फरार है। उन पर 50 हजार का इनाम घोषित किया गया है। इसके अलावा प्रयागराज में एसएसपी के पद पर तैनात अभिषेक दीक्षित पर पैसे लेकर थानेदारों की पोस्टिंग के आरोप के मामले में सितंबर माह में निलंबित कर दिया गया।

उधर बहुचर्चित हाथरस में सामुहिक दुष्कर्म पीडि़ता को आधी रात को जलाने के मामले में भी पुलिस की काफी फजीहत हुई। इसके अलावा माह जुलाई में कानपुर के बिकरू में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों के शहीद होने के मामले में भी पुलिस की काफी फजीहत हुई। वहीं साल खत्म होते-होते कानपुर बिकरू काण्ड के मामले में तत्कालीन एसएसपी अनंत देव को एसआईटी की जांच में दोषी पाये जाने पर निलंबित कर दिया गया।


पशुपालन घोटाले ने किया शर्मिदा
पशुधन विभाग में फर्जी टेंडर से करोड़ों की ठगी मामले में आईपीएस अरविंद सेन और दिनेश चन्द्र दुबे का नाम प्रकाश में आने पर दोनों को निलम्बित कर दिया गया है। अरविंद सेन को भगोड़ा घोषित के  साथ ही गोमतीनगर घर पर पुलिस ने डुगडुगी भी पिटवाई। उन पर 25000 रुपए का इनाम घोषित है। वहीं मामले में हजरतगंज सर्विलांस सेल में तैनात सिपाही दिलबहार यादव ने भी पुलिस को खूब छकाया। हालांकि कई महीनों की फरारी के बाद वह पुलिस के हत्थे चढ़ा था। उस पर व्यापारी को अगवा कर धमकाने का आरोप है।

 

बताते चलें कि वर्ष 2018 में इंदौर के व्यापारी को करीब 200 करोड़ रुपये का टेंडर दिलाने के लिए आरोपियों ने जाल में फंसाया था। 13 जून 2020 को हजरतगंज थाने में केस दर्ज हुआ था। पीडि़त ने पशुधन राज्यमंत्री जय प्रताप निषाद के निजी प्रधान सचिव रजनीश रस्तोगी, निजी सचिव धीरज देव, कथित पत्रकार आशीष राय, मोंटी गुर्जर, उमेश मिश्रा सहित 13 आरोपियों को नामजद किया था। जांच के दौरान आईपीएस अरविंद सेन और दिनेश चन्द्र दुबे पर पीडि़त को धमकाने का आरोप है। आरोपियों ने गेहूं, आटा, शक्कर व दाल आदि की सप्लाई का ठेका दिलवाने के नाम पर 9 करोड़ 72 लाख 12 हजार रुपये की ठगी की थी।

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