Lucknow : टोल प्लाजा छावनी में तब्दील, टोल फ्री कराने में किसान नाकाम

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लखनऊ से सटे टोल प्लाजा छावनी में तब्दील, टोल प्लाजाओं को फ्री कराने में नाकाम
-पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों का दिनभर टोल प्लाजा पर रहा जमावड़ा

लखनऊ। कृषि बिल के विरोध में किसानों द्वारा टोल प्लाजाओं को फ्री कराए जाने की घोषणा को लखनऊ पुलिस की रणनीति ने नाकाम कर दिया। हालांकि इस दौरान छावनी में तब्दील टोल प्लाजा पर दिनभर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का जमावड़ा रहा। वहीं इस दौरान टोल प्लाजा फ्री कराने पहुंचे प्रदर्शनकारियों से पुलिस में तीखी नोंकझोक भी हुई,लेकिन भारी फोर्स बल को देखते हुए प्रदर्शनकारी टोल प्लाजा तक पहुंच बनाने में असफल रहे।
काकोरी थाना क्षेत्र लखनऊ आगरा एक्सप्रेस-वे पर बने टोल प्लाजा पर किसानों के धरना प्रदर्शन के संदेह को लेकर भारी संख्या में कई थानों की पुलिस बल तैनात रहा लेकिन वहां पर कोई भी किसान नेता या समाजवादी पार्टी के नेता व कार्यकर्ता नहीं पहुंचा। पुलिस पूरे दिन मुस्तैद रही। प्रभारी निरीक्षक काकोरी प्रमेंद्र सिंह ने बताया कि टोल प्लाजा के पास में ही तंबू लगाकर कुर्सियों के साथ कालीन भी बिछाई गई थी ताकि धरना प्रदर्शन करने वालों को यहां रोका जा सके। एसीपी डॉ. अर्चना सिंह ने बताया कि यहां पर कोई भी किसान व नेता व कार्यकर्ता नेता नहीं आए। वहीं निगोहां व इंटौजा थाना क्षेत्र स्थित टोल प्लाजा पर भी भारी फोर्स तैनात रही। इस दौरान टोल प्लाजा को फ्री कराने के लिए प्रदर्शनकारी आगे आने का प्रयास किया लेकिन भारी फोर्स को देखते हुए असफल रहे। निगोहां इंस्पेक्टर  ने बताया कि किसान नेता मनोज पटेल अपने समर्थकों के साथ टोल प्लाजा पहुंचे थे। उन्होंने शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद एसडीएम व सीओ को ज्ञापन भी दिया। थोड़ी देर बाद शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर सभी लोग लौट गये। गौरतलब हो कि कृषि कानूनों को लेकर सरकार के प्रस्ताव को ठुकराकर किसानों ने आंदोलन को तेज कर दिया है। इस बावत शनिवार को सभी टोल प्लाजा को फ्री कराये जाने का किसानों ने आह्वान किया था।

कई किसान नेता घर में नजरबंद
अधिकारिक सूत्रों की मानें तो पुलिस ने अपनी रणनीति के तहत शुक्रवार देर शाम को किसान नेताओं को चिहिन्त कर उन्हें घर में ही नजरबंद कर रखा था। जिसके चलते किसान नेताओं नेतृत्व न मिल पाने से प्रदर्शनकारी टोल प्लाजा को फ्री कराने में असमर्र्थ रहे। जिसका नतीजा यह रहा कि प्रदर्शनकारी या तो मौके पर पहुंचे नहीं या फिर अधिकारियों को ज्ञापन देकर लौट आये।

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