लखनऊ अजीत सिंह हत्याकांड का पुलिस ने किया खुलासा ,वर्चस्व कायम रखने के लिए हुई थी हत्या

छह शूटरों ने गोलियों से भूनकर की थी पूर्व ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह की हत्या

पुलिस ने शूटर को गिरफ्तार कर हत्याकाण्ड का किया खुलासा

पूर्वांचल में ठेकदारी में एकतरफा वर्चस्व कामय रखने को लेकर हुई हत्या

लखनऊ। राजधानी के विभूतिखण्ड थाना क्षेत्र में पूर्व ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह की हत्या पूर्वांचल के बाहुबली मुख्तार अंसारी के वर्चस्व को खत्म कर अपना एकतरफा दबादबा कायम रखने को लेकर हुई थी।

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छह शूटरों ने ताबड़तोड़ गोलियों की बौछार कर अजीत सिंह को भून डाला था। पुलिस ने दो सप्ताह बाद शूटर संदीप सिंह उर्फ बाबा को गिरफ्तार कर वारदात का खुलासा किया है। शूटरों के तीन अन्य मददगार भी वारदात में शामिल थे।

संदीप सिंह, गिरधारी विश्वकर्मा, रवि यादव, शिवेंद्र सिंह, राजेश तोमर व बंटी ने गोलियां चलाई थी। इसमें से संदीप सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वारदात में इस्तेमाल असलहा  अलकनंदा अपार्टमेंट से बरामद हुआ है।

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फिलहाल पुलिस की टीम फरार अन्य शूटरों की तलाश में दबिश दे रही है। 

संयुक्त पुलिस आयुक्त नीलाब्जा चौधरी ने हत्याकाण्ड का खुलासा करते हुए बताया कि कठौता चौराहा थाना क्षेत्र विभूतिखंड में पूर्व ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह के हत्याकांड में शामिल शूटर संदीप सिंह उर्फ बाबा को जनपद अंबेडकरनगर से गिरफ्तार किया गया है।

पूछताछ में आरोपी संदीप ने बताया कि गिरधारी उर्फ डाक्टर उर्फ कन्हैया, रवि यादव, शिवेन्द्र सिंह उर्फ अंकुर , राजेश तोमर उर्फ जय, बंटी उर्फ वीरू उर्फ राजेश उर्फ मुस्तफा ने मिलकर 6 जनवरी की रात ताबड़तोड़ फायरिंग कर अजीत सिंह की उदय टावर कठौता चौराहा के पास हत्या कर दी थी।

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पूछताछ में संदीप ने बताया कि अजीत सिंह की हत्या आजमगढ़ जेल में निरूद्घ धु्रव कुमार उर्फ कुन्टू सिंह व अखण्ड प्रताप सिंह के कहने पर की गई है। विभूतिखण्ड इंस्पेक्टर चन्द्रशेखर सिंह ने बताया कि वारदात के बाद सभी लोगों ने असलहा अंकुर को दे दिया था।

गिरफ्तार आरोपी संदीप की निशादेही पर अलकनन्दा अपार्टमेन्ट गोमतीनगर विस्तार के फ्लैट नम्बर 1102 से एक अवैध पिस्टल व 5 जिंदा कारतूस बरामद किया गया है।

गिरफ्तार शूटर संदीप सिंह उर्फ बाबा निवासी जनपद चन्दौली के खिलाफ हत्या समेत करीब डेढ़ दर्जन केस दर्ज हैं। संदीप पर जौनपुर से 10 हजार का इनाम भी घोषित है।

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पूर्व सांसद के इशारे पर डॉक्टर ने शूटर का किया था इलाज

संयुक्त पुलिस आयुक्त निलाब्जा चौधरी ने बताया कि हत्याकाण्ड की साजिश आजमगढ़ जेल में निरूद्घ धु्रव कुमार उर्फ कुन्टू सिंह व अखण्ड प्रताप सिंह ने रची थी। ठेके के कारोबार में व आगामी चुनाव में दबादबा स्थापित करने के लिए हत्या की गई है।

श्री चौधरी के मुताबिक डॉ.एके सिंह ने व्हाटसप काल के माध्यम से धनंजय सिंह के कहने पर घायल शूटर की इलाज किया था।

हालांकि उन्होंने पेट में सरिया धंस जाने की बात कही थी। वहीं बयान में डा.एके सिंह ने बताया कि गोली शरीर में नहीं थी इससे उन्हें आभास भी नहीं हुआ। इस बावत उन्होंने पुलिस को सूचना देना जरूरी नहीं समझा।

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श्री चौधरी ने बताया कि वारदात के बाद गोली से घायल शूटर राजेश तोमर उर्फ जय को लेकर वीरू, शिवेन्द्र सिंह उर्फ अंकुर, बन्धन और विपुल अलकनन्दा अपार्टमेंट पहुंचे जहां उसका इलाज कराया और वहां से सुल्तानपुर होते हुए फरार हो गया।

जेल में रची गई थी हत्याकाण्ड की साजिश

पूछताछ में शूटर संदीप सिंह ने बताया कि करीब एक वर्ष पहले जेल में अजीत सिंह की हत्या की साजिश रची गई थी। तभी से सही मौके का इंतजार किया जा रहा था।

वारदात वाले दिन गिरधारी व रवि यादव स्कूटी पर सवार होकर आये थे। जबकि संदीप, शिवेन्द्र सिंह उर्फ अंकुर एक मोटरसाइकिल व राजेश तोमर उर्फ जय व बंटी उर्फ वीरू उर्फ मुस्तफा एक मोटर साइकिल पर सवार थे।

गिरफ्तार शूटर संदीप ने बताया कि हम लोगों ने काफी देर तक अजीत सिंह की बुलेट पू्रफ गाड़ी का पीछा किया। इसके बाद जब उनकी गाड़ी कठौता चौराहे के पास रूकी।

तभी अजीत सिंह व मोहर सिंह पैदल उतरकर कुछ सामान खरीदने लगे तो हम सभी लोगों ने अपनी अपनी स्कूटी, मोटरसाइकिलों को सड़क के किनारे खड़ा कर दिया।

वहीं अजीत व मोहर सिंह जब सामान खरीदकर अपनी गाड़ी की ओर बढऩे लगे तो 6 शूटरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर अजीत सिंह को भून डाला।

इसके बाद गिरधारी उर्फ डाक्टर व रवि यादव स्कूटी से हम लोग बाइक से कमता बस स्टैंड के पास पहुंचे।

वहां पर बाइक छोड़ दी और बन्धन के साथ लाल रंग की डस्टर गाड़ी में बैठकर अलकनन्दा अपार्टमेंट अवध विहार योजना के पास पहुंचे। पुलिस की मानें तो संदीप वारदात के बाद सरकारी बस से जिला अंबेडकरनगर चला गया।

घायल शूटर राठी गैंग का सदस्य

हत्याकांड की जड़ अब मुन्ना बजरंगी के हत्यारोपित सुनील राठी से जुड़ रही है। नौ जुलाई 2018 को सुनील राठी ने बागपत जेल में बाहुबली मुख्तार अंसारी के करीबी मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वर्तमान में सुनील तिहाड़ जेल में बंद है।

गैंगवार में घायल शूटर राजेश तोमर राठी गैंग का सदस्य बताया जा रहा है। राजेश तोमर तिहाड़ जेल में हत्या के आरोप में 6 वर्ष रहा है। राजेश तोमर बागपत में जून 2020 में हुई परमवीर तुगाना की हत्या में भी वांछित है।

यह था पूरा मामला

6 जनवरी की रात विभूतिखण्ड थाना क्षेत्र स्थित कठौता चौराहा पर हुए गैंगवार में पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। फायरिंग के दौरान अजीत सिंह का साथी मोहर सिंह व एक राहगीर भी गोलीबारी में घायल हुआ था।

6 लोगों के खिलाफ एफ आई आर

मृतक अजीत सिंह पूर्व में मऊ के मोहम्मदाबाद गोहाना का ब्लॉक प्रमुख रह चुका है। मौजूदा समय में वह जिला बदर चल रहा था।

वहीं गैंगवार में घायल मोहर सिंह ने आजमगढ़ के माफिया धु्रव सिंह उर्फ कुंटू सिंह,अखंड प्रताप सिंह और वाराणसी के कन्हैया विश्वकर्मा उर्फ गिरधारी उर्फ डॉक्टर समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी है।

अजीत सिंह जेल में बंद माफिया डॉन मुख्तार अंसारी का करीबी था। विधायक सर्वेश सिंह की 19 जुलाई 2013 को हत्या कर दी गई थी। अजीत सिंह विधायक सर्वेश सिंह उर्फ सीपू सिंह की हत्या के मामले में गवाह था।

अंडरवर्ड और राजनीतिक समीकरणों में उलझी पुलिस, पूर्व सांसद पर कार्रवाई से बच रही पुलिस

जेल की सलाखों के पीछे लिखी गई अजीत हत्याकांड की स्क्रिप्ट

अंडरवर्ड से लेकर पूर्वांचल के बाहुबली राजनेता का नाम है शामिल

लखनऊ। राजधानी में पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह हत्याकांड की गुत्थी भले ही पुलिस ने सुलझा ली हो लेकिन अण्डरवर्ड और राजनीतिक दबाव के चलते सफेदपोशों और बाहुबालियों पर कार्रवाई करने से कतरा रही है।

पूर्वांचल में एकक्षत्र राज और वर्चस्व की लड़ाई में अंडरवर्ड समेत पूर्वांचल के बाहुबली राजनेता के सहयोग इस घटना को अंजाम दिया गया।

अजीत सिंह की हत्या के बाद जरायम की दुनिया में पांव रखने वाले अपराधी भी सिहर गए हैं। क्योंकि इस हत्याकांड की पूरी स्क्रिप्ट जेल की चाहरदीवारी और सख्त सलाखों के पीछे लिखी गई थी। जिसके बाद शॉप शूटरों ने इस हत्याकांड को अंजाम दे डाला।

दरअसल, अस्सी के दशक से पूर्वाचल में राजनीति के गलियारों में सभी जगहों पर बाहुबलियों का असर दिखने लगा था। जिसमें मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी समेत तमाम बाहुबलियों ने वर्चस्व की लड़ाई में राजनीति को अपना हथियार बनाया।

यूपी और बिहार लेकर  इनके नाम का सिक्का कई राज्यों में भी चला। उनमें एक नाम बाहुबली धनंजय सिंह का भी शामिल है। अधिकारिक सूत्रों की मानें तो पूर्व सांसद के इशारे पर अजीत सिंह की मौत की स्क्रिप्ट जेल की सलाखों के पीछे लिखी गई और शॉप शूटरों ने इस वारदात को अंजाम दिया।

खास बात यह है कि मृतक अजीत सिंह की पत्नी ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर हत्या कराए जाने का आरोप लगाया है,लेकिन एफआईआर में पुलिस ने अभी तक नाम शामिल नहीं किया है। हालांकि इस संबंध में ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर नीलाब्जा चौधरी ने कहा कि विवेचना में धनजंय सिंह का नाम शामिल किया जायेगा।

22 साल पहले फेक एनकाउंटर में पुलिस की हुई थी किरकिरी

22 साल पहले यानी 1998 में ही पुलिस ने ‘धनंजय सिंह को एनकाउंटर में मार गिराने की घोषणा कर दी थी। दरअसल 17 अक्टूबर 1998 को पुलिस को मुखबिरों से सूचना मिली कि 50 हजार का इनामी बदमाश धनंजय सिंह अपने 3 अन्य साथियों के साथ भदोही मीरजापुर रोड पर स्थित एक पेट्रोल पंप को लूटने वाला है।

पुलिस ने वहां पर छापा मारा और उसे मार गिराया। इतना ही नहीं पुलिस ने इनमें से एक को धनंजय बताकर उसे मृत भी घोषित कर दिया।

हालांकि करीब 5 महीने बाद फरवरी 1999 में धनंजय पुलिस के सामने आए और फिर खुल गया भदोही पुलिस के फेक एनकाउंटर का राज। मामले में मानवाधिकार आयोग की जांच बैठी और 34 पुलिसवालों पर मुकदमे दर्ज हुए। इस केस की सुनवाई भदोही की स्थानीय अदलात में अब भी जारी है।

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