Blood खून मे मिलावट करने वाला डॉक्टर वा उसका साथी गिरफ्तार

Blood भारी मात्रा में ब्लड व खून बनाने का सामान बरामद मोटी कीमत पर जरूरतमंदों को बेचा जाता था जानलेवा ब्लड

लखनऊ। इंसान के मिलावटी रक्त की तस्करी करने वाले गैंग का स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने भंडाफोड़ करते हुए सरगना डॉक्टर समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से बड़ी तादाद में इंसान का मिलावटी रक्त बरामद हुआ है। यह रक्त बीमार इंसान के लिए जानलेवा भी साबित होता है।

गैंग का सरगना उत्तर प्रदेश के सैफई मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर है। गिरफ्त में आया डॉक्टर केजीएमयू लखनऊ से सन 2000 बैच का एमबीबीएस पासआउट है।

एसटीएफ  प्रमुख आईजी अमिताभ यश के मुताबिक 26 अक्टूबर 2018 को ब्लड की कालाबाजारी के मामले में भंडाफोड़ कर पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था। तभी से ब्लड बैंक के सदस्यों पर निगरानी की जा रही थी। एसटीएफ के मुख्य आरक्षी राजेश मौर्या को जमीनी स्तर के माध्यम से जानकारी मिली कि जनपद लखनऊ के रहने वाले कुछ लोग बड़े पैमाने पर मिलावटी ब्लड की तस्करी कर अधिक कीमत पर जरुरतमंदों व एजेंटो के माध्यम से लखनऊ व आसपास के हास्पिटलों में सप्लाई किया जाता है।

निरीक्षक दिलीप कुमार तिवारी के नेतृत्व में स्थानीय ड्रग निरीक्षक की टीम के साथ मुखबिर के बताये स्थान लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे स्थित टोल प्लाजा के पास संदिग्ध कार सवार को दबोच लिया गया। तलाशी के दौरान कार से ब्लड के पैकेट मिले। पूछताछ में कार चालक ने अपना नाम डॉ. अभय सिंह बताया।

निशानदेही पर साथी अभिषेक पाठक को उसके मकान से पकड़ा गया। गंगोत्री आपार्टमेन्ट अवध बिहार योजना स्थित अभिषेक के मकान से तलाशी के दौरान कुल 55 यूनिट ब्लड घरेलू फ्रीज में रखा हुआ मिला। पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम डा. अभय प्रताप सिंह (एमबीबीएस, एमडी) निवासी 101 सरदार पटेल डेन्टल कालेज रायबरेली रोड लखनऊ, अभिषेक पाठक निवासी हाल पता सी-121 सपना इन्क्लेव  थाना-पीजीआई लखनऊ व स्थायी पता जनपद-सिद्धार्थनगर बताया है।

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 100 यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल्स (पीआरबीसी),21 कूटरचित विभिन्ना ब्लड बैंको के प्रपत्र, आई कार्ड, 23830 रुपये की नकदी समेत अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई सुशान्त गोल्फ  सिटी पुलिस द्वारा की जा रही है। गौरतलब है कि तीन साल पहले भी पकड़ा गया था खून की तस्करी करने वाला गिरोह।

दूसरे राज्यों से लाकर लखनऊ के अस्पतालों में सप्लाई

आरोपी डा.अभय सिंह व अभिषेक पाठक ने संयुक्त रुप से पूछताछ में बताया कि संगठित तरीके से पंजाब, राजस्थान व अन्य प्रान्तों में अपने तस्करों के माध्यम से डोनेट किये हुये अवैध ब्लड को एकत्र करके जनपद-लखनऊ लाकर उस पर कूटरचित पर्चे तैयार करके अवध हास्पिटल आलमबाग, लखनऊ, वर्मा हास्पिटल काकोरी, काकोरी हास्पिटल, लखनऊ निदान ब्लड बैंक, लखनऊ, बंथरा व मोहनलालगंज स्थित हास्पिटल, सुषमा हास्पिटल, लखनऊ व अन्य स्थानों पर सप्लाई किया जाता है।

अन्य प्रान्तों से बल्क में ब्लड देने वाले लोगों में कमल सत्तु, दाता राम, हरियाणा का व लितुदा व केडी कमाल, हरियाणा, व डा. अजहर राव है। वहीं नीलेश सिंह से दिल्ली सप्लाई लिया जाता है। इसके बाद

स्थानीय स्तर पर हमारे एजेंट बृजेश निगम, सौरभ वर्मा, दीपू चौधरी, जावेद खान, धीरज तवर समेत अन्य लोग सप्लाई का कार्य करते हैं।

स्लाइन वाटर मिलाकर बनाते थे ब्लड

पूछताछ में मुख्य आरोपी डॉ.अभय सिंह ने बताया कि वह इटावा स्थित सैफई मेडिकल कालेज में सहायक प्रोफेसर के पद पर है। वर्ष 2000 में केजीएमयू से एमबीबीएस, 2007 में पीजीआई लखनऊ से एमडी. ट्रान्सफ्यूजन मेडिसन का कोर्स किया। वर्ष 2010 से ओपी चौधरी ब्लड बैंक में नियुक्त था। वर्ष 2014 में चरक हास्पिटल लखनऊ में सलाहकार के पद पर रहा। वर्ष 2015 में नैती हास्पिटल मथुरा में सलाहकार के पद पर कार्यरत रहा।

रुपयों की लालच में आकर ब्लड का कारोबार काफी दिनों से कर रहा है। अभय ने बताया कि पंजाब,हरियाण व राजस्थान राज्यों में रक्त दान करने का अधिक चलन है, जिससे वहां आसानी से रक्त उपलब्ध हो जाता है। रुपये 1200 प्रति यूनिट की दर से ब्लड खरीद कर रुपये चार हजार से छह हजार रुपये प्रति यूनिट की दर से सप्लाई किया जाता है।

कभी-कभी ब्लड की अधिक मांग होने पर एक यूनिट ब्लड को स्लाइन वाटर मिलाकर दो यूनिट करके बिक्री किया जाता है। इतना ही नहीं उक्त तस्करी करके लाये गये बल्क ब्लड को वैध रुप में प्रदर्शित करने के लिये फर्जी तरीके से रक्तदान शिविर कर बकायदा फोटाग्राफी का आयोजन किया जाता है।