गैंगेस्टर विकास दुबे का भाई कोर्ट में सरेंडर करने पहुँचा

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20 हजार का इनामिया आरोपी बिकरु कांड के बाद से है फरार
-लखनऊ स्थित मकान की शुक्रवार को हुई थी कुर्की की कार्रवाई

लखनऊ। कानपुर के बिकरु कांड मामले में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे का इनामिया भाई दीपक दुबे उर्फ दीपू फिल्मी अंदाज में कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचा। बताया जा रहा है कि पुलिस को देखकर आरोपित वहां से भाग निकला।

बतातें चलें कि शुक्रवार को उसके लखनऊ के कृष्णानगर स्थित मकान पर कुर्की की कार्रवाई हुई थी। पुलिसिया दबाव के चलते वह कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचा था।

डाली थी आत्मसमर्पण की अर्जी

पुलिस आयुक्त डीके ठाकुर के मुताबिक, कृष्णानगर स्थित आरोपित के मकान की बीते शुक्रवार को कुर्की की गई थी। दबाव पडऩे पर आरोपित ने कोर्ट में आत्मसमर्पण की अर्जी डाली थी। वहीं सूत्रों की मानें तो दीप प्रकाश कोर्ट परिसर में पहुंचा था।

आत्मसमर्पण से पूर्व आरोपित से कोविड  टेस्ट की रिपोर्ट मांगी गई। इस पर वह जांच कराने की बात कहकर वहां से चंपत हो गया। वहीं यह भी बताया जा रहा है कि पुलिस द्वारा पकड़े जाने की डर से कोर्ट परिसर से भाग निकला। हालांकि पुलिस को इस बात की जानकारी थी, जिसके बाद कोर्ट परिसर के आसपास पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।

बावजूद पुलिस को चकमा देकर भागने में कामयाब रहा। फिलहाल आरोपित ने कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के लिए अर्जी दी है। 21 दिसंबर तक आरोपित को आत्मसमर्पण करना है। गौरतलब है कि गत वर्ष दो जुलाई को बिकरु गांव पुलिस विकास दुबे को पकडऩे के लिए गई थी।

दूबे पर 500000 का इनाम था घोषित

विकास ने पुलिस टीम पर साथियों के साथ मिलकर हमला बोल दिया था। इसमें डिप्टी एसपी समेत कुल आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। विकास दुबे पर पांच लाख का इनाम घोषित किया गया था, जिसे उज्जैन से एसटीएफ ने पकड़ा था।

विकास दुबे को उज्जैन से लाते समय कानपुर में विकास ने भागने की कोशिश की थी जिसे मुठभेड़ में एसटीएफ  ने मार गिराया था।

आरोपित पर दर्ज है दो मुकदमे

तफ्तीश में सामने आया कि वर्ष 2017 में एसटीएफ  ने विकास दुबे को कृष्णा नगर से पकड़ा था। विकास को कृष्णा नगर कोतवाली में आम्र्स एक्ट के तहत दाखिल भी किया गया था। विकास अपने भाई दीपक दुबे के नाम से दर्ज प्रतिबंधित बोर का असलहा लेकर चलता था। मामले में दीपक दुबे ने विकास दुबे की जमानत कराई थी।

इस दौरान उसने विकास पर पूर्व में दर्ज मुकदमों का ब्यौरा छिपा लिया था। इसके अलावा दीपक के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार कर कार हड़पने की एक एफआईआर दर्ज थी। एसआईटी ने जांच रिपोर्ट में दीप प्रकाश पर जालसाजी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज करने की संस्तुति की थी,

जिसके बाद 24 नवंबर को उसके खिलाफ  एक और मुकदमा दर्ज हुआ था। दीपक पर 20 हजार का इनाम घोषित है। आरोपित बिकरु कांड के बाद से फरार है। कृष्णानगर कोतवाली में दीपक के खिलाफ  दो मुकदमे दर्ज हैं।

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