धन-दौलत के बावजूद इस गांव के लोग कभी नहीं पहनते कपड़े, पर्यटकों पर भी लागू है ये नियम,

ब्रिटेन के हर्टफोर्डशायर में मौजूद इस गांव का नाम स्पीलप्लाट्ज है। तकरीबन 85 सालों से इस गांव के लोग बिना कपड़ों के ही रहते है।

इस गांव के लोग पूरी तरह से शिक्षित हैं. धन-दौलत भी है। लेकिन, इसके बावजूद बच्चे, बूढ़े, महिला और पुरुष सभी बिना कपड़ों के ही रहते है

बिना कपड़ों के इस गांव में रहते हैं लोग…

ये तो हम सब जानते हैं कि दुनिया में अजीबोगरीब चीजों की कमी नहीं है। कई जगहों पर तो ऐसे मामले देखने को मिल जाते हैं, जिसके बारे में जानकर लोगों को काफी हैरानी होती है।

लेकिन, आज हम आपको एक ऐसी चीज के बारे में बताने जा रहे है, जिस पर आपको यकीन करना मुश्किल हो जाएगा। ऐसा होना भी स्वभाविक है,

क्योंकि मामला ही ऐसा है। क्या आपको मालूम है कि दुनिया में एक गांव ऐसा भी है, जहां के लोग कभी कपड़े नहीं पहनते आप सोच रहे होंगे कि ऐसा हो ही नहीं सकता है। या फिर आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि कहीं गरीबी के कारण तो ऐसा नहीं है।

ऐसे में आपको बता दें कि यहां के लोगों के पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं है, इसके बावजूद यहां के लोग ऐसा करते है। तो आइए, जानते हैं क्या है इस गांव की कहानी?

ब्रिटेन के हर्टफोर्डशायर में मौजूद इस गांव का नाम speel platz स्पीलप्लाट्ज है। तकरीबन 85 सालों से इस गांव के लोग बिना कपड़ों के ही रहते है।

इस गांव के लोग पूरी तरह से शिक्षित है। धन-दौलत भी है। लेकिन, इसके बावजूद बच्चे, बूढ़े, महिला और पुरुष सभी बिना कपड़ों के ही रहते है। बड़ी बात ये है कि ऐसा करने में किसी को भी असहज नहीं लगता।

रिपोर्ट के अनुसार, इस गांव की खोज साल 1929 में इसुल्ट रिचर्डसन ने की थी।

जब उन्होंने इस गांव की खोज की तो फैसला किया कि वह चकाचौंध की दुनिया से दूर इस गांव में अपना जीवन बिताएंगे इस गांव में पब, स्वीमिंग पूल, क्लब की भी व्यवस्था है।

इतना ही नहीं जो लोग इस गांव को देखने आते है। उन्हें भी इन नियमों का पालन करना पड़ता है।

‘ठंड में कपड़े पहन सकते लोग’

हालांकि, अगर सामान लेने के लिए कोई भी शहर या कहीं और जाता है तो कपड़े पहनता है। वहीं, लौटते ही सब बिना कपड़ों के हो जाते हैंैै इसके अलावा जब ज्यादा ठंड पड़ती हैै। तो लोगों को कपड़े पहने की आजादी हैै। या फिर किसी और कारण से किसी को कपड़े पहनने की इच्छा होती हैै। तो वह पहन सकता है।

वहीं, लोग इस तरह से आपस में घुले मिले हैं। कि उन्हें इस बात को लेकर बिल्कुल ही तकलीफ नहीं होती कि वह बिना कपड़ों के है।. कई सामाजिक संस्थाओं ने इस का विरोध भी किया लेकिन, बाद में यह बंद हो गयाा।

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