नींद : जीवन चक्र का अभिन्न अंग नींद हैं ,अनिद्रा रोग के नुक्सान एवम प्रभाव और उपचार

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नींद : अनिद्रा या उन्निद्र रोग (इनसॉम्निया) इस रोग में में रोगी को पर्याप्त और अटूट नींद नहीं आती, जिससे रोगी को आवश्यकतानुसार विश्राम नहीं मिल पाता और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बहुधा थोड़ी सी अनिद्रा से रोगी के मन में चिंता उत्पन्न हो जाती है, जिससे रोग और भी बढ़ जाता है

वर्ल्ड आबादी का एक बड़ा भाग इन्सोमनिया या अनिद्रा की समस्या से ग्रस्त है। भारत में यह समस्या अत्यधिक गंभीर है। महानगरों के 50 प्रतिशत लोग पूरी नींद नहीं ले पाते। अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि अनिद्रा करीब 86 प्रतिशत बीमारियों का कारण है जिनमें अवसाद सबसे प्रमुख है। जानिए क्या है-

नींद न आना क्या है?

इन्सोमनिया या अनिद्रा एक स्लीप डिसआर्डर है, जिसमें नींद लगने या उतनी देर तक सोने में समस्या आती है, जितनी देर आप सोना चाहें। यह किसी भी उम्र में हो सकती है। यह दो प्रकार का होता है शार्ट टर्म (3 सप्ताह तक) या लांग टर्म (3 सप्ताह से अधिक)।

नींद न आना के चार पैटर्न हैं-

नींद आने में समस्या, रात में नींद खुल जाना और दोबारा न आना, सुबह उठने के बाद फ्रेश अनुभव न करना, दिन में नींद आना, उत्तेजना या चिड़चिड़ापन।

पर्याप्त नींद क्या है?

पर्याप्त नींद’ वह है जब आप अगले दिन तरोताजा और चुस्त अनुभव करते हैं। अधिकतर वयस्कों के लिए यह मात्रा 6-8 घंटे होती है, लेकिन बहुत से लोगों के लिए यह 9-10 घंटे होती है। कुछ के लिए यह मात्रा छह घंटे या उससे भी कम होती है।

जो लोग नियमित रूप से 6-8 घंटे की नींद लेते हैं उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है। नींद दो प्रकार की होती है गहरी नींद, जिसमें अगर व्यक्ति पांच घंटे भी सो जाता है तो शरीर को आराम मिल जाता है। दूसरी कच्ची नींद, ये भले ही आठ घंटे की हो तो भी शरीर को आराम नहीं मिलता और दिन भर थकान और सुस्ती बनी रहती है।

अनिद्रा की कमी के नुकसान:

आज कम से कम 60 प्रतिशत लोग सप्ताह में कईं रातें पूरी नींद नहीं ले पाते हैं। कम सोने से जीवनकाल तुलनात्मक रूप से घट जाता है। अनिद्रा के कारण अवसाद, एंग्जाइटी जैसे मानसिक रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अनिद्रा के कारण शरीर में भूख का अहसास कराने वाले हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिसके कारण लोग अधिक मात्रा में खाते हैं। अनिद्रा से मेटाबॉलिज्म की दर धीमी होने से भी मोटापा बढ़ता है। अनिद्रा से पाचन समस्या जैसे कब्ज, बदहजमी, एसिडिटी हो सकती हैं।

जैविक घड़ी:

सोने और जागने का चक्र हमारे म‍स्तिष्क के द्वारा नियंत्रित होता है, जो प्रतिदिन की दूसरी चीजों को भी नियंत्रित करता है। जैसे शरीर के ताप में परिवर्तन, रक्तचाप और हार्मोन का स्राव। इसमें मेलैटोनिन रसायन प्रमुख भूमिका निभाता है इसे ‘अंधेरे का हार्मोन’ भी कहते हैं। इसकी कमी चौकन्नापन बढ़ाती है और अधिकता उनींदापन बढ़ाती है, जिससे शरीर स्लीप मोड में आ जाता है।

क्यों होती है अनिद्रा की समस्या:

भावनात्मक समस्याएं जैसे तनाव, एंग्जाइटी और अवसाद अनिद्रा के सबसे बड़े कारण हैं, लेकिन आपकी दिनचर्या और आपका शारीरिक स्वास्थ्य भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ दवाइयां भी नींद में बाधा डाल सकती हैं जैसे अवसाद, उच्च रक्तचाप, हाइपरथायरॉइडिज्म के उपचार के लिए ली जाने वाली दवाइयां। गर्भ निरोधक गोलियां और कार्टिकोस्टेरॉयड भी अनिद्रा का कारण बन सकते हैं। अत्यधिक कैफीन और अल्कोहल का सेवन अनिद्रा की समस्या को और बढ़ा देता है। देर रात तक इंटरनेट मोबाइल चलाने या टीवी देखने से सोने में समस्या आती है।

क्या हैइलाज़ :

किसी चिकित्सकीय या भावनात्मक समस्या के कारण आपको नींद नहीं आती तो पहले उसका उपचार कराएं। एक अनुशासित दिनचर्या का पालन करें। देर रात तक इंटरनेट मोबाइल और टीवी देखने की आदत बदलें। कैफीन और अल्कोहल का सेवन अधिक मात्रा में न करें।

दो सप्लीमेंट्स को सुरक्षित और प्रभावकारी माना जाता है। एक वैलेरियन है, यह एक हर्ब है, जो बेहतर तरीके से सोने में सहायता करती है, लेकिन इसका सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के न किया जाए। नींद की गोलियाें का उपयोग कुछ समय के लिए करें, क्योंकि इसके साइड इफेक्ट्स होते हैं।

बिहेवियर थैरेपी:

इसमें अनिद्रा से पीड़ित व्यक्ति को नया स्लीप बिहेवियर सिखाया जाता है और उसके स्लीप एनवायरमेंट को सुधारने का प्रयास किया जाता है।

काॅग्निटिव बिहेवियोरल थेरैपी:

काॅग्निटिव बिहेवियोरल थैरेपी इस तथ्य पर आधारित है कि गहरी नींद के लिए म‍स्तिष्क का शांत होना जरूरी है। यह थेरैपी नकारात्मक विचारों और चिंताओं को नियंत्रित कर दूर करने में सहायता करती है ताकि म‍स्तिष्क को शांत कर गहरी नींद में सोने में सहायता मिल सके।

फैक्ट : कॉर्टिसोल एक स्ट्रेस हार्मोन है। यदि शरीर में इस हार्मोन की मात्रा ज्यादा है, तो इसे प्राइमरी इन्सोमनिया का संकेत माना जा सकता है।