UP News : बिना मिट्टी के खेती आसान, छतों पर फसल उगा रहे किसान

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लखनऊ। बागवानी का नाम समाने आते ही लोगों के जहन में लम्बे चौड़े खेत-खलिहान, ट्रैक्टर और खाद बीज का ख्याल मन में उबरने लगता है। लेकिन अब भूमिहीन किसान भी अपने अनूठे अंदाज से अपनी छतों पर बिना माटी और सिर्फ थोड़े से पानी की मदद से हरी-भरी सब्जियों की पैदावार कर रहें हैं। खेती की खासियत यह है कि इसमें रासायनिक खाद व कीटनाशक दवाओं का उपयोग नहीं होता है। वहीं केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने आम लोगों तक सस्ते दर पर हाइड्रोपोनिक्स विधि पहुंचाने का रुख किया है।
खेती का लिया प्रशिक्षण
केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ एसआर सिंह ने करीब 12 डिजाइन बनाए है। जिसमें कई तरह की सब्जियां पैदावार किसानों को दिखाई गई। जिसमें मलिहाबाद तहसील के गांव मोहम्मदनगर तालुकेदारी के तीन किसानों ने  वर्टिकल खेती का प्रशिक्षण लेने के बाद अपने छतों पर हरी-भरी सब्जियों की पैदावार शुरु कर दी।  अब गांव के दर्जन भर से ज्यादा किसान इस खेती को हुनर सीख दूसरों को भी वर्टिकल खेती करने के सीख दे रहे हैं।

वर्टिकल बागवानी का क्रेज

खासतौर पर जमीन न होते हुए भी खेती करने का शौक शहरों में पनप रहा है। ऐसे में केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने भूमिहीन किसानों को घरेलू आवश्यकता के लिए सब्जियां उगाने व बागवानी करने के तमाम सुविधाएं भी मुहैया करा रहा है। शहरीय लोगों में वर्टिकल फार्मिंग का रुझान बढ़ने के बाद संस्थान ने इसे गांव में भी लोकप्रिय बनाने का बीड़ा उठाया है। शुरुआती दौर में भूमिहीन किसानो ग्रामीणो को संस्थान ने डिजाइन किए गए स्ट्रक्चर्स दिए। इसके अलावा भूमिहीन किसानों को खेती के लिए अतिरिक्त बीज, पौधे और जरूरी जानकारी दी गईं।

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक भी पीछे नहीं

केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के मुताबिक, वर्टिकल बागवानी लिए सीमित स्थान पर विशेष प्रकार के ढांचे का इस्तेमाल होता है। वहीं शहरों में भी हाइड्रोपोनिक तकनीक प्रयोग में लाई जा रही है। हालांकि, ग्रामीणस्तरों पर हाइड्रोपोनिक्स विधि का प्रयोग अभी संभव नही हो सका है। यही वजह है कि, कम लागत वाले वर्टिकल फार्मिंग ढांचे बनाकर संस्थान ने इस प्रक्रिया को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रयास प्रारंभ किया किया।

हर मौसम में होती है फसलों की पैदावार

कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, वर्टिकल खेती में सब्जियां हर मौसम में उगाई जा सकती हैं। लेकिन सर्दी के सीजन में  सब्जियों का चुनाव करने के लिए बहुत बड़ी सूची होती है। इस मौसम में कीड़ों और बीमारियों का प्रकोप कम होता है। गर्मियों और बरसात मौसम में किसान पालक,  चौलाई, लोबिया, बैगन की पैदावार आसानी से कर सकते है। जबकि सर्दियों में  पोक, चोई, लेट्यूस, पालक, मेथी, ब्रोकली, मिर्च और सरसों का साग समेत अन्य सब्जियों की पैदावार कर सकते है।