मदरसा शिक्षकों का बुरा हाल,लखनऊ से लेकर दिल्ली तक फरियाद

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चार साल से मानदेय न मिलने पर शिक्षक झेल रहे भुखमरी का दंश

प्रतिमाह मानदेय दिए जाने की राज्य और केन्द्र सरकार से गुहार

मानदेय न मिलने पर शिक्षकों में आक्रोश,प्रदर्शन की चेतावनी

लखनऊ। सूबे की राजधानी लखनऊ समेत अन्य सभी जनपदों के मदरसा शिक्षकों का चार वर्ष से अधिक समय से पूरा मानदेय न मिलने से बुरा हाल है। करीब चार से अधिक समय से केन्द्र सरकार द्वारा दिया जाने वाला मानदेय न मिल पाने से शिक्षकों का परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच चुका है। वहीं बीते माह राज्य सरकार द्वारा राज्यांश जारी होने के बाद भी एक दो जिलों को छोड़कर अन्य जिलों के शिक्षकों को नहीं मिल पाया है। शिक्षकों का बकाया मानदेय जारी कराने के लिए इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ के पदाधिकारी प्रदेश की राजधानी से लेकर दिल्ली तक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एजाज अहमद के मुताबिक मदरसों में दीनी तालीम के साथ ही बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी बाजपेई ने योजनान्र्गत एक मदरसे में तीन शिक्षकों को आधुनिक विषय पढ़ाने के लिए नियुक्ति किया था। मौजूदा समय में आधुनिक विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों को मानदेय के रूप में राज्य सरकार से तीन हजार व केन्द्र सरकार से 12 हजार रुपये प्रतिमाह दिया जाता है।

राज्य सरकार अपना अंशदान दो तीन माह के बाद तो जारी कर देती है। लेकिन केन्द्र सरकार से मिलने वाला केन्द्रांश वर्ष 2017 से शिक्षकों को नहीं मिल पाया है। जिससे शिक्षक व उनका उनका परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच चुका है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि करीब चार साल से अधिक समय से केन्द्र सरकार से मिलने वाला मानदेय नहीं मिला है। वहीं राज्य सरकार से जो राज्यांश मिलता है वो भी प्रतिमाह नहीं मिलता है। वहीं अगर तीन चार महीने बाद राज्यांश जारी भी हो गया तो वह शिक्षकों के खाते में आते-आते महीनों लग जाते हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष का कहना है कि मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को नियमित किया जाए। इसके अलावा जब तक नियमित नहीं किया जाता केन्द्र और राज्य से मिलने वाला मानदेय प्रतिमाह दिया जाए।

दो विभागों की फेर में अटका शिक्षकों का मानदेय

इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एजाज अहमद ने बताया कि मदरसा योजनान्र्गत पूरे देश में शिक्षकों की संख्या भारी तादात में है। केवल उत्तर प्रदेश में 25 हजार शिक्षक मदरसे में पढ़ा रहे हैं। नियमित मानदेय न मिल पाने से शिक्षक व उनका परिवार भुखमरी से गुजर रहा है। कई शिक्षक मदरसों में पढ़ाने के बाद सब्जी के ठेले तक लगाने को मजबूर हैं। श्री अहमद ने बताया कि योजना अंतर्गत (एसपीक्यूएम/एसपीईएमएम) को एमएचआरडी से अल्पसंख्यक मंत्रालय में कर दिया गया है। बजट दोनों विभागों के बीच में अटका हुआ है। वहीं दोनों विभागों के प्रशासनिक अधिकारी जिम्मेदारी से अपना-अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। वहीं मानदेय न मिलने से नाराज शिक्षकों ने प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी है।