पिता ने लगाई फटकार तो बेटे ने मार दी गोली

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पिता ने लगाई फटकार तो बेटे ने मार दी गोली

हालत गंभीर,अस्पताल में भर्ती

लखनऊ। पढ़ाई के लिये बार-बार टोकने से गुस्साये पुत्र ने पिता को लाइसेन्सी बन्दूक से गोली मार दी।

हमले में पिता गंभीर रूप से घायल हो गए।

परिवार के लोग उन्हें लोहिया अस्पताल ले गये, जहां हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया।

एडीसीपी पूर्वी एसएम कासिम आब्दी के मुताबिक देवा रोड स्थित कोहिनूर अपार्टमेंट में अखिलेश सिंह अपने परिवार के संग रहते है।

अखिलेश एक निजी सुरक्षा कंपनी में गार्ड के रुप में तैनात हैं। परिवारीजनों के मुताबिक अखिलेश का बेटा अमन दसवीं का छात्र है।

रविवार को वह मॉर्निंग वॉक कर घर पहुंचे। तो देखा कि उनका 19 साल का बेटा अमन पास ही स्थित कादिर कबाड़ी की दुकान पर बैठा था।

इस पर अखिलेश ने अमन को फटकार लगाई। पिता की सार्वजनिक रुप से लगाई गई फटकार नागवार गुजरी।

इस दौरान पिता पुत्र में कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते अमन गुस्से से तमतमा उठा।

वह नाराज होकर घर के अंदर चला गया। थोड़ी देर बाद अमन पिता की लाइसेंसी बंदूक लेकर निकला आया।

यह देख अखिलेश ने उससे बंदूक छीनने की कोशिश की। हालांकि तब तक अमन ने गोली चला दी।

गोली अखिलेश के जांघ पर लगी। वह खून से लथपथ होकर गिर गये। वहीं गोली की आवाज सुनकर परिवारीजन व अन्य पड़ोसी बाहर निकले तो अखिलेश को जख्मी देखा।

लेकिन अमन वहां से भाग निकला था। आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई। वहीं घायल अखिलेश को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जहां हालत गंभीर होने पर ट्रामा सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया।

एडीसीपी पूर्वी कासिम आब्दी के मुताबिक अखिलेश की हालत खतरे से बाहर है।

पिता पर हमला करने के मामले में अमन के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

आरोपी की तलाश की जा रही है। वहीं परिवारीजनों ने पुलिस को बताया कि अमन पढ़ाई में लापरवाही करता था। जिसे लेकर अक्सर उसके पिता नाराज रहते थे।

इसी बात पर उसे फटकार लगाई थी। खतरनाक साबित हो रहे लाइसेन्सी असलहे

आत्मरक्षा के लिये जारी किये गये लाइसेंसी असलहे खतरनाक साबित हो रहे हैं।

जो खुद अथवा घर के लोगों की जान तक ले रहे हैं। हाल में ही अपर मुख्य सचिव डॉ रजनीश दुबे के निजी सचिव विशम्भर दयाल ने बापू भवन के दफ्तर में लाइसेंसी असलहे से विशम्भर ने आत्महत्या कर ली थी।

यहीं नहीं बीते कुछ माह में देखा जाये तो करीब आधा दर्जन से अधिक लोगों ने इसी लाइसेन्सी असलहों से अपनी या अपने करीबियों की जान ली है।