मकान निर्माण का ठेका मंजूर कर बिल्डर ने हड़प ली बुजुर्ग की खुशियां

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लखनऊ। प्रदेश में भू-माफियों पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार प्रयासरत है। फिर भी भू-माफिया दबंगई के बल पर मजबूर लोगों की संपत्ति पर अपना कब्जा जमाए हुए हैं। एक ऐसा ही मामला समाने आया है। जहां कई सालों से एक बुजुर्ग अपने पैतृक मकान को बिल्डर के कब्जे से मुक्त कराने के लिए अधिकारियों और थाने में मदद की गुहार लगा रहा है। इसके बाबजूद उसे पुलिस और सरकार की तरफ से उसे किसी प्रकार की सहायता नहीं मिल पाई है।

सात साल से लड़ रहा हक की लड़ाई

जानकारी के मुताबिक, कैसरबाग थानाक्षेत्र के मोहल्ला हातालाल निवासी  शादाब अहमद पेशेवर कार मैकेनिक है। उन्होने बताया कि उनके पिता इश्तियाक अहमद की उम्र 80 साल की है। उनका परिवार एक लम्बे अरसे से अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है। उनकी मदद के लिए अब तक प्रशासन भी मौन है। बताया कि कैसरबाग में उनका एक पैतृक मकान है। जो उनके पिता इश्तियाक अहमद के नाम पर है। कुछ साल पहले उनके पिता की मुलाकात नादान महल रोड़ निवासी मो.रेहान किदवई से हुई थी।
उस वक्त रेहान ने खुद एक बिल्डर बताया था। इसके बाद रेहान उनके घर पर अक्सर आता-जाता था।ऐसे में रेहान का संबंध घरेलू हो चुका था। बताया कि इसी बीच उनके पिता ने रेहान पर भरोसा कर अपने मकान निर्माण का ठेका उसे दे दिया। इस एवज में बिल्डर की सहमति पर उनके पिता ने करीब दस महीने का एक आवासीय एग्रीमेंट भी तैयार करवाया था। इसके आधार पर बिल्डर ने दस महीने में मकान को तैयार करने का वादा भी किया था।
उनका आरोप है कि एग्रीमेंट की समय सीमा समाप्त होने पर मकान पूरा नही हुआ तो  इस बात पर उनके पिता ने नाराजगी जताई थी। तब बिल्डर ने उसी एग्रीमेंट पर एक साल का अतिरिक्त समय मांग लिया था। ऐसे में रेहान पर विश्वास कर उनके पिता ने एक साल का समय दे दिया था। आरोप है कि दोबारा एक साल की मोहलत मिलने के बावजूद बिल्डर ने मकान का निर्माण पूरा नहीं किया और न पैसे वापस किए थे। तब उनके पिता को रेहान की नियत पर शक होने लगा था।
तो फौरन उनके पिता ने बिल्डर को मकान खाली करने का अल्टीमेटम दिया था। लेकिन रेहान मकान खाली नही किया। जब उनके पिता ने विरोध किया तब रेहान ने मकान पर अपना मालिकाना हक जताते हुए उनके पिता से उल्टा ही मकान खाली करवा लिया। बताया कि उस वक्त  उनके पिता ने बिल्डर व उसके साथियों के खिलाफ कैसरबाग कोतवाली में भी शिकायत दी थी। लेकिन पुलिस ने पैसा का विवाद का हवाला देते हुए बिल्डर के खिलाफ केस दर्ज नही किया था।
बताया कि इस घटना को करीब सात साल हो चुके है। सात साल से उनके पिता अपने परिवार के साथ एक किराए के मकान में रह रहें हैं। अपना घर होने के बावजूद बिल्डर उनके घर पर कब्जा जमाए हुए है। आरोप है कि बिल्डर ने मकान के नीचे हिस्से में दो दुकानें भी तैयार की है। जोकि कानून रूप से गलत है। बताया कि कई बार उनके पिता ने बिल्डर से मकान खाली करने की फरियाद भी की, लेकिन बिल्डर ने गाली-गलौज कर उन्हें भगा दिया।
इसके बाद उनके पिता ने बिल्डर व उसके साथियों के खिलाफ मुख्यमंत्री शिकायत प्रकोष्ठ में शिकायत दी। फिर भी बिल्डर के पास से उन्हें अपना हक नहीं मिल सका है।