आधार कार्ड से ऑनलाइन लाखों रुपये उड़ाने वाले दो शातिर जालसाज गिरफ्तार

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-साइबर क्राइम सेल व कृष्णानगर पुलिस की संयुक्त टीम ने किया खुलासा

-गिरफ्तार आरोपियों ने अब तक सैकड़ों खातों में सेंधमारी की बात कबूली

लखनऊ। आधार कार्ड की बायोमेट्रिक फिंगर प्रिंट की क्लोनिंग कर ऑनलाइन धोखाधड़ी कर लाखों रुपयों की ठगी करने वाले दो शातिर जालसाजों को लखनऊ कमिश्नरेट की साइबर क्राइम सेल व कृष्णानगर पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। गिरफ्तार आरोपियों ने अब तक सैकड़ों लोगों के खाते से लाखों रुपये निकाले जाने की बात कबूल की है। फिलहाल पुलिस टीम आरोपियों से पूछताछ कर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

दो शातिर जालसाज गिरफ्तार

संयुक्त पुलिस आयुक्त नीलाब्जा चौधरी ने खुलासा करते हुए बताया कि साइबर क्राइम व कृष्णानगर पुलिस की संयुक्त टीम ने एईपीएस (आधार इनेबल्ड पेमेंन्ट सिस्टम) के माध्यम से आमजन के खातों से रुपए उड़ाने वाले दो शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों ने अपना नाम देवेन्द्र कुमार मौर्या निवासी देवगांव जनपद आजमगढ़ हालपता श्रीनगर कालोनी जनपद वाराणसी व रमेश कुमार निवासी जनपद जौनपुर बताया है।

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल, एक स्टाम्प मशीन (क्लोन फिंगर प्रिंट), चार बायोमेट्रिक डिवाइस सिंगल साइडेट टेप व दो वाटर पेपर समेत अन्य सामग्री बरामद हुई है। श्री चौधरी के मुताबिक गत माह साइबर क्राइम सेल लखनऊ में केनरा बैंक के खाता से एईपीएस के माध्यम से लगभग 50000 रुपये का ऑनलाइन स्थानान्तरण के मामले में केस दर्ज किया गया था।

पुलिस उपायुक्त मध्य सोमेन वर्मा के पर्यवेक्षण में सहायक पुलिस आयुक्त साइबर क्राइम सेल के निर्देशन में मामले से जुड़ी सभी जानकारियां साइबर सेल लखनऊ के आरक्षी सुनील कुमार द्वारा एकत्र की गयी। साक्ष्यों के आधार पर उक्त दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो मामले का खुलासा हुआ। आरोपी देवेन्द्र ने बताया कि वह श्चड्ड4ढ्ढहृक्र कम्पनी में काम करता है।

कंपनी एईपीएस (आधार इनेबल्ड पेमेन्ट सिस्टम) सर्विंस प्रोवाइड कराती है। उसके पास डिस्ट्रीब्यूटर व मास्टर डिस्ट्रीब्यूटर आईडी पासवर्ड है। इच्छुक रिटेलर को आधार से पैसा निकालने वाली सर्विस के लिए आरटीआईडी व पासवर्ड उपलब्ध कराता था। आरोपी ने बताया कि वह आधार कार्ड नम्बर से एईपीएस के जरिए फिंगरप्रिंट के माध्यम से लोगों के खाते से रुपये पार कर देता था।

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