UP: रिजल्ट तैयार करने वाली कम्पनी से साठगांठ कर शिक्षकों को नियुक्ति कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश

एसटीएफ ने सरगना समेत गिरोह के तीन सदस्यों को लखनऊ से दबोचा  
लाखों की नकदी समेत अन्य कूटरचित दस्तावेज बरामद
परीक्षा नियामक प्राधिकारी के कर्मचारियों की मिलीभगत के मिले प्रमाण

लखनऊ। परीक्षा केन्द्र का मैनेजमेंट व प्रतियोगी परीक्षाओं का रिजल्ट तैयार करने वाली कम्पनी से साठगांठ कर फर्जी प्रमाण पत्रों के माध्यम से शिक्षकों की नियुक्ति कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एसटीएफ ने सरगना समेत तीन लोगों को विभूतिखंड लखनऊ से गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार सरगना स्वयं भी जूनियर हाई स्कूल में फर्जी शिक्षक के रूप में तैनात रहा है। एसटीएफ को मामले में परीक्षा नियामक प्राधिकारी प्रयागराज के कार्यालय के कर्मचारियों की मिली भगत के प्रमाण मिले है।

एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश के मुताबिक मुखबिर से सूचना थी कि फर्जी तरीके से शिक्षकों की नियुक्ति कराने वाले गैंग का सरगना अपने कुछ साथियों से मिलने व पैसों व प्रपत्रों का लेन-देन करने के लिए शुक्रवार सुबह पिकप भवन के पास पहंचेगा। एसटीएफ की टीम उक्त स्थान पर पहुंचकर घेराबंदी करते हुए सुबह करीब 8:00 बजे  पिकप भवन तिराहे से तीन लोगों को दबोच लिया।

गिरफ्तार आरोपियों ने अपना नाम राम निवास उर्फ राम भईया निवासी जनपद फिरोजाबाद (फर्जी स्कूल  शिक्षक), संजय सिंह निवासी जिला गया बिहार हाल पता जनपद गाजियाबाद (डाटा साफ्ट कम्प्यूटर सर्विसेज प्रा.लि. का प्रोडक्शन मैनेजर) व रविन्द्र कुमार उर्फ रवि निवासी जनपद आगरा हाल पता जनपद आगरा (फर्जी शिक्षक प्राथमिक विद्यालय बनकटा देवरिया) बताया है।

पकड़े गये आरोपियों के पास से 250000 रुपये, खाते में फ्रीज करायी गयी 19 लाख की धनराशि, अभ्यर्थियों से संबंधित प्रमाण पत्र समेत अन्य कूटरचित दस्तावेज बरामद हुए हैं।

गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई विभूतिखंड पुलिस द्वारा की जा रही है। आरोपी राम निवास ने बताया कि साथी रवीन्द्र कुमार की मदद से जनपद हरदोई में 09, इटावा में 10, अमेठी में 05, गोण्डा में एक , बलरामपुर में एक, औरैया में एक , जालौन में 09, श्रावस्ती में 08 तथा सीतापुर, हाथरस व प्रयागराज जनपदों में लगभग 100 से अधिक प्राथमिक शिक्षकों को फर्जी रूप से नियुक्त कराया है। इसके एवज में करोड़ों रुपये कमाये हैं।

धोखा होने पर खुद का गिरोह बनाकर कराने लगा नियुक्ति

गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि जनपद देवरिया में विनय तिवारी व कुशीनगर में मनीष यादव फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर प्राइमरी अध्यापक के रूप में तैनात है, जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जी तरीके से अभ्यर्थियों को नियुक्त कराने का काम करते हैं। वर्ष 2016 में 15000 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती थी जिसमें रामनिवास ने उन्हें अपने 15 कैडिडेट दिये थे। प्रति कैडिडेट 06 लाख की दर से कुल 90 लाख रुपये भी दिये थे। सभी की देवरिया में ज्वाइनिंग भी हो गयी परन्तु कुछ माह बाद उन्हें फर्जी रूप से नियुक्ति बता कर निकाल दिया गया था।

अभ्यर्थी रामनिवास पर पैसा वापसी का दबाव बनाने लगे। इसके बाद वह अपना गिरोह बनाकर वर्ष 2017 में 68500 व वर्ष 2018 में 69000 प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में राम निवास व रवीन्द्र ने अपने कैंडिडेट भर्ती कराये।

बेबसाइट पर अपलोड होता था अभ्यर्थियों का विवरण

गिरोह का सरगना रामनिवास ने बताया कि अभ्यर्थियों को भरोसे में लेने के लिए पूर्व में नियुक्ति सम्बन्धित समस्त विवरण विभाग की बेवसाइट पर उपलब्ध था। जिसे कोई भी देख सकता था।
परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के लिपिक नरेन्द्र कन्नौजिया से साठगांठ कर सभी फर्जी शिक्षकों को बेसिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर सभी विवरण सत्यापित कर अपलोड कराया जाता था। जिसके बदले लिपिक नरेन्द्र को प्रति कैंडिडेट 50 हजार रुपये मिलता था। पूछताछ में राम निवास ने बताया कि वह परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय प्रयागराज के कई अन्य कर्मियों से नियुक्ति कराने के लिए सहयोग लेता रहा। इसके अलावा टीजीटी व पीजीटी परीक्षा की आन्सर-की के माध्यम से भी अपने कई कैंडिडेट को पास करवाया। इतना ही नहीं साथी नीरज की मदद से साल्वर बैठा कर भी कुछ कैंडिडेट पास कराये।

सौदा तय करने के लिए लखनऊ आया था सरगना

राम निवास के साथी रवीन्द्र ने उसकी मुलाकात डाटा साफ्ट कम्प्यूटर सर्विसेज प्रा.लि. दिल्ली के मैनेजर संजय सिंह से करायी। परीक्षा वर्ष 2021 में प्रतिभाग करने वाले अपने कैंडिडेट की सूची देने को कहा था। इतना ही नहीं संजय ने कहा था कि परीक्षाओं का रिजल्ट तैयार करने वाली कम्पनी के लोगों से उनके सम्बन्ध हैं। इसलिए ओएमआर शीट चाहे खाली अथवा भरी हो दोनों स्थितियों में मैनेज कर रिजल्ट में पास करवा देंगे। राम निवास ने व्हाट्सअप के माध्यम से 34 टीजीटी कैडिडेट की सूची रवीन्द्र सिंह के माध्यम से संजय को भेजी थी। दिल्ली में संजय से कई बार मुलाकात होने पर प्रति कैडिडेट 07 लाख की दर से सौदा तय हुआ था। राम निवास ने बताया कि संजय को 05 लाख रुपये एडवांस व इन्फोलिंक कम्पनी के किसी अधिकारी से मुलाकात कराने के लिए पिकअप तिराहा गोमतीनगर पर एकत्र हुये थे और पकड़ लिये गये।