Police Commissionerate System : अपराधिक घटनाओं के उतार-चढ़ाव के बीच गुजरा वर्ष 2020


नए वर्ष में हत्या, डकैती और लूट समेत कई अन्य मामले खुलासे के इंतजार में
– हत्या समेत अन्य मामलों में कमी, घरेलू हिंसा, आत्महत्या और दहेज हत्या में इजाफा
– वाहन चालान, शमन शुल्क और सीजर में बढोत्तरी,पूरे वर्ष जाम से जूझते रहे शहरवासी
 

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में पुलिस कमिश्नरी और कोरोना महामारी ने जहां एक ओर अपराधिक घटनाओं के ग्राफ  में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है तो वहीं दूसरी ओर घरेलू हिंसा,दहेज हत्या व आत्महत्या जैसी घटनाओं में इजाफा हुआ है। साथ ही वाहन चालानों, शमन शुल्क और सीजर में कई गुना बढ़ोत्तरी हुई,लेकिन जाम से शहरवासियों को निजात नहीं मिला। वहीं कोरोना काल में पुलिस का मानवीय चेहरा भी सामने आया है। हालांकि साल की शुरूआत व अंत में हत्या,डकैती, लूट व अपहरण की घटनाओं ने कमिश्नरी प्रणाली पर सवालियां निशान भी दागे हैं। वहीं हत्या, डकैती व लूट समेत कई अन्य वारदातें अभी भी खुलासे के इंतजार में है। फिलहाल लखनऊ पुलिस के लिए नया साल भी चुनौतीपूर्ण रहेगा।
गौरतलब हो कि कानून-व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सूबे की योगी सरकार ने राजधानी लखनऊ  व गौतमबुद्घनगर में गत वर्ष जनवरी में कमिश्नरी प्रणाली लागू की थी। लखनऊ में आईपीएस सुजीत कुमार पाण्डेय को पुलिस कमिश्नर बनाया गया। साथ ही दो ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर के साथ ही  दर्जनभर से अधिक आईपीएस अफसरों को शहर को पांच जोन में बांटते हुए जिम्मेदारी दी गई। इसके अलावा यातायात- व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए आईपीएस रैंक के अधिकारी को बतौर यातायात डीसीपी नियुक्त किया गया। पुलिस कमिश्नर सुजीत पाण्डेय करीब 10 माह शहर की कानून-व्यवस्था पर बेहतरीन काम किया। हालांकि बंथरा शराब काण्ड और स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए उनका स्थानांतरण कर दिया गया। वहीं 18 नम्बर को एटीएस के एडीजी डीके ठाकुर को लखनऊ का नया पुलिस कमिश्नर बनाया गया। श्री ठाकुर 94 बैच के आईपीएस अफसर ठाकुर 2010 से 2012 तक लखनऊ के कप्तान रह चुके हैं।


हत्या,डकैती और लूट की घटनाओं ने दी चुनौती
पुलिस कमिश्नरी प्रणाली वर्ष 2020 जनवरी में लागू होते ही बदमाशों ने ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम दिया। इनमें 2 फरवरी को हजरतगंज में मॉनिंग वॉक पर निकले विश्व हिंदू महासभा के अध्यक्ष रणजीत बच्चन की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। इस मामले में चौकी इंचार्ज समेत चार पुलिसकर्मी निलंबित भी हुए। हालांकि पुलिस ने इस हत्याकाण्ड का खुलासा कर दिया था। इसके बाद मार्च से कोरोना के दस्तक और फिर लॉकडाउन से अपराधिक घटनाएं लगभग शून्य हो गई। वहीं अनलॉक के शुरूआत होते ही फिर से बदमाश सक्रिय हो गये। काकोरी में 14 जुलाई को दिनदहाड़े असलहे के बल पर बदमाशों ने सचिवालयकर्मी को बंधक बनाकर डकैती की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने इस डकैतीकाण्ड का भी खुलासा कर दिया था। वहीं 24 अगस्त को हसनगंज थाना क्षेत्र में कबीर मठ के महंत धीरेन्द्र दास को गोली मारकर बदमाशों ने पुलिस महकमे में हडकंप मचा दिया था। हालांकि कुछ दिन बाद ही महंत ने दम तोड़ दिया था। इस मामले में भी पुलिस की काफी फजीहत हुई। बीते माह 22 नवम्बर को हजरतगंज के लॉप्लास बिल्डिंग में बर्थ-डे पार्टी के दौरान राकेश रावत की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गई थी। इस मामले में उसके दोस्तों पर हत्या का आरोप लगा है। इसके अलावा काकोरी में गत माह आढती चन्द्रशेखर लोधी से छह बदमाशों ने उसकी पिटाई कर दो लाख और चेन लूट लिया। इसके साथ ही काकोरी में ही सेल्समैन जितेन्द्र जायसवाल को गोली मार लूट, विभूतिखण्ड में गन्ना विभाग में कार्यरत इंजीनियर योगेन्द्र श्रीवास्तव के परिवार को बंधक बनाकर डकैती व चिनहट में लूट की व गाजीपुर में सोमवार बीती रात बीएसएनएल के रिटायर्ड कर्मी को बंधक बनाकर लूट पुलिस के लिए चुनौती है।


कोरोना काल में सामने आया पुलिस का मानवीय चेहरा
विश्व महामारी कोरोना काल में पुलिस का मानवीय चेहरा सामने आया। लॉकडाउन के घोषणा के बाद आयी चुनौतियों में लखनऊ पुलिस ने एक मिसाल पेश की। मजदूरों के पलायन की जिम्मेदारियों से लेकर भूखों व असहाय लोगों की मदद कर पुलिस आमजनों के दिलों को जीत लिया। इसके अलावा हॉटस्पाट चिन्हित इलाकों में ड्यूटी पर मुस्तैद होकर अपने फर्ज को बाखूबी से अंजाम देते हुए महकमे का नाम रोशन किया। इस दौरान कोरोना योद्घाओं में शामिल सैकड़ों पुलिसजन संक्रमित भी हुए।  

ताबड़तोड़ एनकाउंटर से बदमाश खौफजदा
पुलिस कमिश्नरेट लागू होने के बाद ही एनकाउंटर का सिलसिला भी जारी हो गया। आतंक का पर्याय बन चुके अपराधियों की धर पकड़ के साथ ही मुठभेड़ की भी शुरूआत हुई। हालांकि निशानेबाज पुलिस की गोली सिर्फ बदमाशों के पैर में ही लगती रही। करीब दो दर्जन से अधिक हुए एनकाउंटर में इनामिया समेत कई बदमाशों को सलाखों के पीछे भेजा गया। वहीं एनकाउंटर के खौफ  से ज्यादातर बदमाश शहर छोड़ दिए। ऑनलॉक होते ही पुलिस कमिश्नरेट अपराधों की संभावनाओं को देखते हुए बदमाशों को चिन्हित कर जेल के सलाखों के पीछे भेजने में जुट गई। जिसका नतीजा यह रहा कि अपराध का ग्राफ काफी कम हो गया। वहीं छुट-भयैया सैकड़ों बदमाशों को जिला बदर करते हुए शहर के बाहर भेज दिया।


सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शन रही चुनौती
बीते वर्ष 2019 दिसबर से सीएए -एनआरसी को लेकर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन पुलिस कमिश्नरेट के लिए चुनौती लेकर आया। हिंसक विरोध प्रदर्शन के मामले में 63 मुकदमें, 57 पर गैंगस्टर व 32 गुण्डा और 8 पर एनएसए के तहत कार्रवाई की गई है। इसके अलावा आरोपियों के पोस्टर चौराहों पर लगाने के साथ की कुर्की की कार्रवाई भी की गई। वहीं फरार आरोपियों पर इनाम घोषित कर सलाखों के पीछे भेजने का सिलसिला अभी जारी है।  

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