Lucknow : कोरोना में गायब हो 10 हजार वाहन मालिक, पुलिस ढूंढ नहीं पा रही पता

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अब ट्रैफिक डिपार्टमेंट एएनपीआर सिस्टम के जरिए लापता गाडी मालिकों को कर रहा ट्रेस

लखनऊ ।  कोरोना काल में खाली सड़कों पर ट्रैफिक रूल्स तोड़ने और नो-पार्किंग जोन में गाडी पार्क करने वालों का चालान काटकर ट्रैफिक डिपार्टमेंट डाक के जरिए उनके घर चालान भेज रहा है । इनमें कुछ चालान तो वाहन मालिकों के पास पहुंच गए है, लेकिन गलत पता होने पर 10 दस हजार से ज्यादा चालान पुलिस के लिए मुसीबत बने हैं । अब डिपार्टमेंट एएनपीआर सिस्टम की मदद से गायब हो चुके वाहन स्वामी की खोजबीन कर रहा है।

4 महीने में ढाई लाख से ज्यादा चालान

दरअसल, कोरोना काल में राजधानी की सड़कों पर फर्राटा भरने और नो-पार्किंग जोन में खड़ी गाडियों को टो-कर जाम से निजात दिलाने के लिए ट्रैफिक डिपार्टमेंट का अभियान अभी चल रहा है। जनवरी से अप्रैल तक डिपार्टमेंट ने प्रदूषण फैलाने, खतरनाक ड्राइविंग, बिना हेलमेट, सीट बेल्ट समेत नो-पार्किंग जोन में खड़ी गाडियों का फोटो खींच कर लगभग ढाई लाख से ज्यादा गाडियों का चालान किया। फिर डिपार्टमेंट ने गाड़ियों की नंबर प्लेट के आधार पर रजिस्ट्री द्वारा चालान गाड़ी स्वामी के पते पर भेज दिया। इसमें कुछ पते चालान पहुंच गए, लेकिन आज भी दस हजार से ज्यादा चालान वापस आ गए। जांच में हकीकत समाने आई कि जिन गाड़ियों का चालान किया गया था। अब उनके मालिक उस पते पर नहीं रहते हैं। अब डिपार्टमेंट गायब हो चुके गाडी मालिकों का पता लगाने के लिए हर चौराहे पर नई तकनीक का इस्तेमाल कर रही है।

लोगों ने ट्रांसफर नहीं कराई गाडियां

ट्रैफिक डिपार्टमेंट के मुताबिक, राजधानी में हजारों की तादाद में गाडी मालिक ऐसे हैं । जो गैर जनपद के रहने वाले हैं। वह कई सालों से राजधानी में रह रहे हैं। इसके बावजूद गाडी मालिकों ने आरटीओ में गाड़ी को ट्रांसफर नहीं कराया है। वर्तमान समय में इन गाडी मालिकों को आरटीओ में स्लॉट न मिल पाने का सटीक बहाना भी मिल चुका है।  इस वजह से उनकी खोजबीन करने में भी समय लग रहा है।

क्या है एएनपीआर सिस्टम

ट्रैफिक डिपार्टमेंट के मुताबिक, कोरोना काल में गायब हो चुके गाडी मालिकों की खोजबीन के लिए एएनपीआर सिस्टम यानि ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन काफी मददगार है। यह सिस्टम गाड़ियों की पहचान करने के लिए इस्तेमाल होगा। जिससे हर चौराहों लगाया गया है। बताया कि यह सिस्टम चौराहे पर लगे वीवीएस यानी व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम से जुडा है। जो ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम जीपीएस पर आधारित है। गायब हो चुके गाडी मालिकों की लोकेशन सेटेलाइट के जरिए ट्रैफिक डिपार्टमेंट के सर्वर रुम तक पहुंच जाएगी।  इस मामले में एएसपी ट्रैफिक सैफुद्दीन ने बताया कि जिले भर में लगभग दस हजार चालान ऐसे हैं, जिनके पते गलत है। दिल्ली, मुम्बई और बैंगलोर की तर्ज पर डिपार्टमेंट लापता गाडी मालिक की तालाश में एएनपीआर सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है।