social media : सोशल मीडिया पर पैनी नज़र, खुराफाती बचकर जाएंगे किधर

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social media : एक साल में 1107 यूजर्स पर केस दर्ज, आईटी एक्ट के तहत की गई कार्रवाई

लखनऊ। बीते एक डेढ़ साल से जिस तरह लोग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन उस वक्त कुछ खुराफाती सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर अजीबो-गरीब हरकत कर रहे हैं। आजादी के नाम पर खुराफाती दूसरों की भावनाओं का आहत करते हैं। इसके अलावा भड़काऊ शब्दों का इस्तेमाल और अफवाह फैलाकर यूजर्स को भ्रमित करते हैं। हैरत की बात है, आजकल यह सारे काम सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म पर हो रहे हैं। जबकि यूपी पुलिस और शासन लगातार यूजर्स से सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट अपलोड़ करने, हिंसा भड़काने और अफवाह न फैलने की अपील कर रही है। इसके बावजूद यूजर्स अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में बीते एक साल से 1107 यूजर्स पर एकाउट ब्लॉग उन पर कार्रवाई की गई है।

social media : पुलिस प्रशासन का एक्शन

एडीजी लॉ एंड आर्डर यूपी प्रशांत कुमार ने बताया कि यूपी में 01 जून 2020 से 31 मई 2021 तक सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने वाले 1107 यूजर्स पर मुकदमा दर्ज किया जा चुके हैं। इनमें 118 यूजर्स पर अफवाह फैलता, भ्रमित करना और फेक न्यूज शेयर करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। जबकि सांप्रदायिक फैलाने वाली पोस्ट पर 366 केस, आपत्तिजनक पोस्ट ऑडियो-वीडियो के आरोप में 623 यूजर्स पर कार्रवाई की जा चुकी है। बतायाकि, हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी वायरल हुआ था। वीडियो गाजियाबाद जनपद का था। जिसमें कुछ लोग एक मुस्लिम बुजुर्ग की पिटाई करते दिखाई पड़े। तमाम टिप्पणियों को लेकर गाजियाबाद पुलिस ने 09 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर तमाम यूजर्स का रि-एक्शन दिखाई देने लगा। हालांकि योगी सरकार ने सभी जिलों में साइबर सेल यूनिट गठित कर खुराफातियों पर पहले से शिकंजा कसना शुरु कर दिया था।

बच्चा चोरी की अफवाह थी सिर दर्द

यूपी में साल 2019 में बच्चा चोर गिरोह की घटनाओं ने सोशल मीडिया पर तूल पकड़ लिया था। ऐसे में पुलिस लोगों जहन में पनप चुके डर को खत्म करने करने का प्रयास कर रही थी। तो सोशल मीडिया पर नई-नई कहानियां और  अफवाहें तेजी से फैलने लगी थी। इस मामले को लेकर राजधानी लखनऊ के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने के आरोप में तीन लोगों को अरेस्ट किया था। दो महीने बाद तीनों को जमानत पर रिहा किया गया था। इसी तरह सीएए और एनआरसी के विरोध में सोशल मीडिया पर खुराफात करने वाले पांच लोगों को पुलिस ने अरेस्ट कर सलाखों के पीछे भेज दिया था। जबकि कोरोना काल में सोशल मीडिया पर वैक्सीन के बारे में टिप्पणी करने के आरोप में पुलिस ने फिरोजाबाद जनपद  के सिरसागंज कस्बे के एक युवक को अरेस्ट किया था।

आईटी एक्ट के तहत होती कार्रवाई

लखनऊ हाईकोर्ट के वकील रवि अस्थाना बताते हैं कि सोशल मीडिया पर क्राइम कंट्रोल करने के लिए साइबर सेल का गठन किया गया है। आईपीसी धारा 66-A के तहत इन मामलों में कार्रवाई की जाती है। बताया कि इस धारा किसी व्यक्ति विशेष पर की जाने वाली आपत्तिजनक टिप्पणी पर लगाम कसने के लिए की जाती है। लेकिन पुलिस इस धारा का गलत इस्तेमाल करने लगी थी। साल 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने 66-A को निष्प्रभावी कर दिया था। फिर आईटी एक्ट का कानून लागू कर दिया। इस कानून को साइबर क्राइम ने सोशल मीडिया को आईपीसी के खेमे में लगा दिया है, जहां कड़ी सजा का प्रावधान है।