Fraud In Lucknow : सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले पिता-पुत्र गिरफ्तार

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 Fraud In Lucknow : एसटीएफ व मेरठ पुलिस की संयुक्त टीम ने आरोपियों को ठाकुरगंज से दबोचा

Fraud In Lucknow : लखनऊ। सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर सैकड़ों बेरोजगारों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के पिता-पुत्र को ,

एसटीएफ व मेरठ पुलिस की संयुक्त टीम ने ठाकुरगंज लखनऊ से गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों के पास से नकदी,कार समेत भारी मात्रा में कूटरचित दस्तावेज बरामद हुए हैं।

एसटीएफ के प्रभारी पुलिस अधीक्षक  विक्रम सिंह के मुताबिक जनपद मथुरा निवासी त्रिभुवन सिंह से उनके पुत्र व,

पुत्री को सीआरपीएफ  में हेड कांस्टेबल के पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर लगभग 25 लाख रुपये ठगी की गयी थी।

जालसाजों ने माप तौल लिखित परीक्षा स्वाथ्य परीक्षण कराने के लिए कूटरचित दस्तावेज देकर डीआईजी सीआरपीएफ  अजमेर राजस्थान भेजा तो वहां पता चला कि यहां पर कोई भर्ती नहीं है।

इस संबंध में पीडि़त त्रिभुवन सिंह ने 27 अगस्त 2021 को थाना रिफाइनरी जनपद मथुरा में मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की जांच एसटीएफ कर रही थी।

शुक्रवार 05:50 बजे सुबह उप निरीक्षक पंकज सिंह के नेतृत्व में साइबर क्राइम टीम एसटीएफ मुख्यालय व,

मथुरा पुलिस की संयुक्त टीम ने ठाकुरगंज चौराहे के पास सदगुरू सहाय रोड गोदाम के बेसमेंट से गिरोह सरगना और एक सदस्य को दबोच लिया।

पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम राजेश गुप्ता व अभिषेक गुप्ता निवासीगण कन्हैया माधवपुरी कालोनी दुबग्गा काकोरी बताया।

 Fraud In Lucknow : गिरफ्तार आरोपियों के पास से :

12 मोबाइल, पांच कूटरचित नियुक्ति पत्र,

91 बायोडाटा शैक्षिक दस्तावेजों के साथ,397 विभिन्न दस्तावेजों की प्रतियां, मोहर पैड, 123 फोटो, चार कूटरचित आफर लेटर,

दो चार पहिया वाहन, 18600 रुपये की नकदी समेत अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं।

गिरफ्तार आरोपी राजेश गुप्ता ने बताया कि एफसीआई, रेलवे, ब्रिटिस एम्बेसी,अमेरिका एम्बेसी,

पंजाब नेशनल बैंक, बैंक आफ  बडोदा,राष्ट्रपति भवन, मैट्रो, विद्युत विभाग, शिक्षा विभाग,

108 एम्बुलेन्स,सीएचसी,सीआरपीएफ  समेत अन्य सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करता था।

आरोपी ने अब तक सैकड़ों लोगों से ठगी करने की बात कबूल की है।

Fraud In Lucknow : कम वेतन मिलने पर बेटे के साथ मिलकर करने लगा ठगी

गिरफ्तार आरोपी राजेश गुप्ता ने बताया कि वर्ष 1989 में जीपीओ लखनऊ की कैटीन में सेल्समैन के पद पर नौकरी ज्वाइन किया।

वर्ष 2002 में बर्खास्त हो गया। 17 महीने बाद बहाल हुआ और 2005 में फिर से सस्पेन्ड कर दिया गया।

2006 में बहाल होने के बाद विभाग ने प्राइमरी स्केल पर वेतन कर दिया।

वेतन कम होने पर लोगों को संविदा व सरकारी पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी कर जालसाजी करने लगा।

आरोपी ने बताया कि त्रिभुवन सिंह से उनके पुत्र व पुत्री को सीआरपीएफ  में भर्ती कराने के लिए वर्ष 2016 से लेकर 2019 तक कुल 25 लाख रुपये लिए हैं।

राजेश गुप्ता ने बताया कि बरामद कूटरचित दस्तावेज लैपटाप से मेरा पुत्र अभिषेक गुप्ता बनाता था।

आरोपी राजेश लोगों से खुद को मुख्य डाक घर लखनऊ का मैनेजर बताकर झांसे में लेकर ठगी करता था।