जमा है बैंको में 35,000 करोड़ रुपये! लेने वाला कोई नहीं, “कहीं यह पैसा आपका तो नहीं ?

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देश के कई बैंकों में एक-दो लाख नहीं बल्कि 35 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा ऐसा पैसा जमा है, जिसे कोई निकालने आता ही नहीं है. यह पैसा फिक्स डिपॉजिट के साथ ही सेविंग और करंट अकाउंट्स में 10 साल से ज्यादा वक्त बीतने के बाद भी पड़ा है.

नई दिल्‍ली. हमारी आदत होती है कि पैसों को संभाल कर रखते हैं और बाद में भूल जाते हैं. गद्दों के नीचे, किचन में डिब्‍बों में तो कई बार जेब में ही पैसे पड़े रह जाते हैं. देश में चार साल पहले यानि 8 नवंबर 2016 को हुई नोटबंदी के बाद न जाने घरों से कितने रुपये निकले जो महिलाओं ने आड़े वक्त के लिए बचाकर रखे थे.

बाद में कई वाकये ऐसे भी आए, जिसमें बड़ी-बड़ी रकम भी निकली जो लोग खुद रखकर भूल गए थे. यहां तक तो समझ में आता है, लेकिन क्या आप अपना पैसा बैंक में जमा (Bank Deposits) करके निकालना तो नहीं भूल गए. एक बार दिमाग पर जोर डालिए क्‍योंकि आंकड़े तो यही कह रहे हैं कि देश में लाखों लोग अपना पैसे की सुध लेना ही भूल गए हैं.

हमारे देश में जहां कुछ रुपयों के लिए बड़े-बड़े अपराध हो जाते हैं, वहां कई बैंकों में एक-दो लाख नहीं बल्कि 35 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा ऐसा पैसा जमा है, जिसे कोई निकालने आता ही (Unclaimed Deposits) नहीं. ऐसा नहीं है कि यह पूरा पैसा फिक्स डिपॉजिट (Fixed Deposits) में जमा है, बल्कि सेविंग व करंट अकाउट्स (Saving & Current Accounts) में दस साल से ज्यादा के वक्त के बाद भी पड़ा है. वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने देश के बैंकों में पड़े ऐसे ही अनक्लेम अमाउंट को लेकर रिपोर्ट तैयार की है.

बीमा कंपनियों के पास ही 53 हजार करोड़ से ज्यादा रकम

बैंकों में पैसा रखकर भूल जाने के अलावा इस रिपोर्ट में ऐसे लोगों का भी जिक्र भी है, जिन्‍होंने विभिन्‍न कंपनियों के जरिए बीमा या पॉलिसी करवाई, लेकिन उसका भी क्लेम नहीं लिया. जानकार हैरानी होगी कि अलग-अलग बीमा कंपनियों के पास आज की तारीख में ऐसे 53,116 करोड़ रुपये पड़े हैं, जिन पर किसी ने दावा ही नहीं किया है.

इसमें भी नॉन लाइफ इश्योरेंस पॉलिसी यानि एक्सीडेंट कवर इंश्‍योरेंस, हाउस होल्‍ड इंश्योरेंस, टर्म प्लान, हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम लेने कोई नहीं आया. ऐसे मामलों में 1579.47 करोड़,जबकि लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी कंपनियों के पास 53,115.86 करोड़ रुपये दावा नहीं किए जाने के कारण पड़े हैं.

कैसे मिल सकता है आपको अपना पैसा

बैकिंग विशेषज्ञ जितेश श्रीवास बताते हैं कि कई लोग एक से ज्यादा बैंक में खाता खुलवाते हैं. जहां उनके 500 से 1000 रुपये तक जमा रहते हैं, लेकिन वो उन्हें यह सोचकर नहीं निकालते हैं कि शायद बैंक ने कई चार्जेज लगाकर पैसा काट लिया होगा. हालांकि, ऐसा सिर्फ उन खातों में होता है, जहां न्यूनतम राशि बैंक में रखना अनिवार्य होती है.

अगर मिनिमम बैलेंस रखना अनिवार्य नहीं है तो आप जब चाहें अपना पैसा निकाल सकते हैं. यही नहीं आपको बैंक ब्याज सहित पैसा वापस करेगा. साथ ही यदि आप छिपकर भी किसी बैंक में पैसा जमा करते हैं तो उसकी जानकारी भी अपने किसी परिजन को जरूर दें ताकि आपके नहीं रहने पर घर की जरूरत के लिए वो पैसा निकाला जा सके.

परिजनों को जरूर बताएं

इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़े कृष्णपाल के अनुसार, नॉन लाइफ इश्योरेंस पॉलिसी की बात हो या फिर लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की, ज्यादातर मामलों में जब कोई पॉलिसी मैच्योर होने या बीमित व्यक्ति की मौत के बाद क्लेम के लिए नहीं आता तो यह राशि कंपनियों के पास रहती है. कई बार लोग बीमा करवाते हैं, लेकिन परिजनों को नहीं बताते या फिर कई बार परिजन भी नहीं पूछते कि उनके बड़ों ने कोई पॉलिसी ली है या नहीं. इसके चलते उनके जाने के बाद परिजनों को भी इसका फायदा नहीं मिल पाता. ऐसे में जरूरी है कि अपनी हर पॉलिसी के बारे में परिजनों को पूरी जानकारी जरूर दें.

यूं ही पड़ा यह पैसा जाता कहां है

बैंकों में दस साल तक यूं पड़ा हुआ जमा आरबीआई को दे दिया जाता है. आरबीआई इसे अपनी स्कीम डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (DEAF) में जमा करती है, जिसका मुख्य काम जमाकर्ताओं के हितों को बढ़ावा देने और ऐसे अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करना होता है. दूसरी तरफ इंश्योरेंस पॉलिसी के पास पड़ा अनक्‍लेम्‍ड अमाउंट मैच्योरिटी के 10 साल बाद भी क्लेम नहीं करने पर केंद्र सरकार की सीनियर सिटिजन वेलफेयर फंड (SCWF) में जमा कर दिया जाता है, जहां से बुजुर्गों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए इस राशि को खर्च किया जाता है.

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